• जानिये फांसी देने के पूर्व कैदी के कान में जल्लाद क्या कहता है... ईनाम...

    नमस्कार दोस्तो आज हम आपको ले जायेंगे एक ऐसे रहस्य की ओर जिसको आप भी जानना चाहेंगे, दोंस्तो अक्सर आपने फिल्मो मे देखा होगा या कहीं से सुना होगा की किसी अपराधी को फंासी पर चढाने के पूर्व जल्लाद कैदी के कानो मे कुछ कहता है। तो दोस्तो आज हम आपको इस रहस्य से वाकिफ कराना चाहेंगे । नको ईनाम भी दिया जाता है।

  • माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स

    दोस्तो आज हम बात करेंगे माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स के बारे में। दोस्तो माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स लडकियाॅ थी।

  • जानिए दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान कौन था...

    नमस्कार दोस्तो, हर कोई जानना चाहता है की दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान तो आइये आज हम जानते है हमारे अस्तित्व के बारे मे, आइये जानते है हमारे इतिहास को । इसके अलावा आज हम आपको बतायेंगे उस महिला के बारे मे जिसने दुनिया पर पहली बार बच्चा पैदा किया।

हमे छोड़कर चले गए चंचल गौरैया, जानिए इसके पीछे का रहस्य...

    नमस्कार दोस्तो, दोस्तो इस संसार में लाखो प्रजाति की पक्षियाॅ पाई जाती है। ये पक्षियाॅ दिखने में सुंदर और आकर्षक होती है। दोस्तो आज हम बात करेंगे इन्हीं पक्षियो में से एक ऐसी पक्षी के बारे में जो कि इन्सान प्रेमी है। जी हां दोस्तो गौरैया एक ऐसी चिडियाॅ है जो इन्सानो के साथ रहना पसंद करती है। ये नन्हीं गौरेया ज्यादातर बस्तियों एवं घरो में अपना घोशला बनाती है। आश्वर्यजनक बात यह है कि पिछले कुछ वर्षो से इनकी संख्या में 60 फीसदी तक कमी हो चुकी हैं। ये चिडियाॅ आज के आधुनिक वातावरण के अनुरूप अपने आप को ढाल नहीं पा रही है। इस कारण इसकी संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। आइये दोस्तो जानते है इस नन्हीं गौरेया पक्षी के बारे में एवं इसकी संख्या में कमी होने के पीछे का कारण।
 नन्हीं एवं आकर्षक  गौरैया : 

    गौरैया इन्सानो की सबसे करीबी पक्षियों में से एक होती है। ये हमेशा इन्सानो के करीब रहना पसंद करती है एवं अपना घोशला भी इन्सानी बस्ती एवं घरो में बनाती है। छोटी - सी दिखने वाली इस पक्षी की लम्बाई 15 सेमी तक होती है। इनका पूरा जीवनकाल 2 वर्षो का होता है इस दौरान ये 5 - 6 अण्डे देती है। नन्हीं सी दिखने वाली ये गौरैया लगभग 25 - 35 ग्राम वजनी होती है। ये ज्यादातर समूहो में रहती है तथा घरो के आसपास आसानी से पायी जाती है। परन्तु दोस्तो दुख की बात यह है कि ये सुंदर गौरैया अब विलुप्त होने की कगार पर है।

    दोस्तो इस चिडिया की संख्या इतनी कम हो गयी है कि अब इन्हें संरक्षण की आवश्यकता है। इनके संरक्षण के लिए इन्हे रेड लिस्ट में डाल दिया गया  है। दोस्तो दुख तो उस समय होगा जब बचपन से देखते आ रहे ये चंचल नन्हीं गौरैया पक्षी इस धरती से पूरी तरह विलुप्त हो जायेगी। दोस्तो आप सभी से निवेदन है कृप्या इस चंचल गौरैया पक्षी की संरक्षण में अपना योगदान जरूर देवें। क्योंकि दोस्तो सरकार तो सिर्फ योजनाए चला सकती है इन योजनाओं को सफल या असफल बनाना हम सभी पर निर्भर करता है। दोस्तो आशा है आप सभी इस सुंदर गौरेया की रक्षा करेंगे। आइये जानते है इस चिडियाॅ की विलुप्तिकरण के कुछ कारण।

    दोस्तो गौरैया अत्यंत संवेदनषील पक्षी है। चूॅकि आज का तापमान ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ गया है इस कारण इन पक्षियो पर बढते हुए तापमान का प्रतिकूल प्रभाव पड रहा है। अत्यधिक तापमान की वजह से इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। इसके अलावा दोस्तो प्रत्येक जगह पर टाॅवर एवं रेडिएशन की अधिकता की वजह से इनकी संख्या में लगातार कमी होती जा रही है।

    दोस्तो ये गौरैया पक्षी मिट्टी के ठण्डे मकानो में अपना घोषला बनाते है परन्तु शहरीकरण एवं पक्के मकानो के निर्माण के कारण इनका आवास स्थान भी प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा और भी अनेको कारण है जिससे इनकी संख्या लगातार घट रही है।

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देखते देखते अचानक यूँ गायब हो गया ताजमहल...


        नमस्कार दोस्तो, कैसे है आप, स्वागत है आप सभी का। दोस्तो आपने बहुत सारे जादूगरो के बारे में सुना ही होगा बहुत सारे जादू के शो देखे होंगे। आज हम एक ऐसे जादूगर के बारे में बात करेंगे जिसने सात अजूबो में से एक अजूबा प्रसिध्द पर्यटन स्थल ताजमहल को ही पर्यटको के सामने गायब कर दिया था। जी हाॅ दोस्तो एक ऐसा जादूगर जिसने सभी पर्यटको के सामने ही आगरा के ताजमहल को 2 मिनट के लिए गायब कर दिया था। आइये जानते है यह जादूगर कौन था और उसने ऐसा कैसे किया था। 


    ताजमहल गायब करने वाला महान जादूगर था पी. सी. सरकार जूनियर। पी. सी. सरकार जूनियर भारतीय मूल के ही है इसकी 8 पीढियाॅ जादूगरी में पारंगत थी। जादूगर पी. सी. सरकार जूनियर ने अपनी बेटी मनेका कीमदद से 2 मिनट के लिए ताजमहल गायब कर दिया था। जादूगर पी. सी. सरकार जूनियर कहते थे कि जादू 8 पीढियो से उनके खून में था। वह खूद को “इन्द्रजाल” का मास्टर बताता है। यह थी जादूगर की जानकारी, आइये अब जानते है जादूगर पी. सी. सरकार जूनियर ने ताजमहल को गायब कैसे किया।

   दरअसल दोस्तो जादूगर पी. सी. सरकार जूनियर ने ताजमहल गायब नही किया था उन्होने वहां मौजूद सभी पर्यटको में जादू से भ्रम पैदा कर दिया था। जादूगर ने ताजमहल के आस पास 400 मीटर की दूरी पर भ्रम पैदा कर दिया था, जिससे 400 मीटर के अंदर से ताजमहल पर्यटको को दिखाई नही दे रहा था। जादूगर ने पर्यटको में द्रष्टि संबंधी भ्रम पैदा कर दिया था। विज्ञान के अनुसार जादूगर ने प्रकाश किरणों को पर्यटको की आँखों तक पहुॅचने से रोक दिया जिससे वहाॅ मौजूद दर्शको को ताजमहल नहीं दिख रहा था।

  ताजमहल को वापस प्रकट करने के लिए जादूगर को अपनी बेटी मनेका से सहायता मिली जिससे उसने ताजमहल को 2 मिनट के पश्यात फिर से प्रकट किया। दोस्तो देखा जाये तो जादूगर ने पर्यटको पर सिर्फ भ्रम इन्द्रजाल पैदा किया था जिससे पर्यटको को लग रहा था कि ताजमहल नियत स्थान से गायब हो चुका है। यह पूरी घटना सन् 2000 में हुई थी।

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ताजमहल के अनसुलझे रहस्य

     
नमस्कार दोस्तो, यह पूरी दुनिया विभिन्न प्रकार के रहस्यो से भरी पडी है इनमें से बहुत सारे रहस्य सुलझ चुके है परन्तु बहुत सारे रहस्य ऐसे भी है जो आज तक अनसुलझा हुआ है। इन्ही अनसुलझे हुए रहस्यो में से एक है ताजमहल का रहस्य। दोस्तो अब आप सोचेंगे कि ताजमहल में कैसा रहस्य हो सकता है इसे तो मुगल बादशाह शाहजहाॅ ने बनवाया था जो कि सात अजूबों में से एक है और भारत का प्रसिध्द पर्यटन स्थल है। दोस्तो ताजमहल के तहखाने में बहुत सारे अनसुलझे हुए रहस्य और सुरंग है। इन रहस्यो को सरकार भी सुलझाना नहीं चाहती इसलिए इनके रास्तो को बंद कर दिया है। आइये जानते है इन रहस्यो पर शोधकर्ताओं के क्या मत है।

     शोधकर्ताओं का मानना है कि ताजमहल के तहखानें में अनेको रहस्य छुपे हुए है। इन रहस्यो के खुल जाने से संभवतः इतिहास में परिवर्तन हो सकते है। शोधकर्ताओं का मानना है कि ताजमहल ऊपर की ओर जितना बडा है उतना नीचे की ओर भी है तथा यह भी कहा जाता है कि ताजमहल के नीचे लगभग हजार कमरे है। शोधकर्ताओ ने इन रहस्यो का पता लगाने की कोशीश की किन्तु अधिकारियो ने तहखाने वाली सभी रास्तो को बंद कर दिया। माना जाता है इनमें एक सुरंग है इन तहखाने वाले सुरंग में मुमताज महल की कब्र है। इस सुरंग का रहस्य भी अनसुलझा हुआ है। सुरंग का कारण यह भी हो सकता है कि पुराने समय में हर एक महल में एक गुप्त सुरंग होती थी ताकि दुश्मनो के आक्रमण के समय स्त्री और बच्चो को सुरक्षित बचाया जा सके।

यमुना नदी के कारण टिका है ताजमहल :

     यमुना नदी के किनारे बना है। शोधकर्ताओ के अनुसार ताजमहल लकडी के एक बेस के ऊपर बना है। यमुना नदी के पानी के कारण इस लकडी पर नमी बनी रहती है जिससे यह लकडी मजबूत बनी हुई है।

    दोस्तो महत्वपूर्ण बात यह है कि मुगल बादशाह शाहजहाॅ ताजमहल के ठीक सामने यमुना नदी के दूसरे किनारे पर एक ब्लैक ताजमहल बनाने वाला था किन्तु उसके बेटे औरंगजेब ने शाहजहाॅ को बन्दी बना लिया जिससे शाहजहाॅ का यह सपना अधूरा ही रह गया। 

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जनिये नागमणि का अद्भुत रहस्य और यह कैसे बनता है...?


    नमस्कार दोस्तो, दोस्तो आपने नागमणि के बारे मे तो सुना ही होगा। नागमणि एक अनसुलझा हुआ रहस्य है। कई लोगो का मानना है कि नागमणि इस दुनिया में मौजूद है परन्तु बहुत लोग मानते है कि नागमणि जैसी को चीज नहीं होती। वाकई में दोस्तो नागमणि का होना या ना होना एक रहस्य बन गया है परन्तु दोस्तो आज हम इस रहस्य से पर्दा उठाने वाले है। दोस्तो आज हम नागमणि के बारे में हर एक रहस्य बतायेंगे। और यह भी बतायेंगे कि नागमणि की उत्पत्ति कहाॅ से हुई और नागमणि कैसे बनता है। इन सब बातो को जानने के लिए यह आर्टिकल पूरा जरूर पढे। आशा है यह आर्टिकल आपको पसंद आये।

       नागमणि के बारे में तो आपने फिल्मों में देखा ही होगा या सुना होगा। कहानी तथा लोककथाओं में भी नागमणि प्रचलित है। कुछ लोगो का मत है कि नागमणि कहानी मात्र ही है हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता। परन्तु वृहत्ससंहिता नामक एक ज्योतिषशास्त्र ग्रंथ में साफ लिखा है कि इस दुनिया में मणिधारी नाग मौजूद है। यह नाग दुर्लभ हो चुकें है इस कारण बहुत सारे लोग नागमणि को असत्य मानते है। दोस्तो पौराणिक कथाओं में भी नागमणि के बारे में जिक्र है। पौराणिक कथाओ के अनुसार भगवान श्रीकृष्णका भी एक बार मणिधारी नाग से सामना हो चुका है। आइये जानते है नागमणि के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें।

       नागमणि अन्य सभी मणियो से सबसे उत्तम और अद्वितीय होता है। यह अत्यंत चमकीला होता है। नागमणि जिस किसी के पास भी होता है उस पर किसी भी प्रकार के विश का कोई प्रभाव नहीं पडता है। नागमणि इतनी अलौकिक होती है कि जिसके पास भी नागमणि होती है वह हर एक रोग से मुक्त रहता है। दोस्तो यहाॅ पर सवाल यह बनता है कि आखिर नागमणि की उत्पत्ति कहाॅ से हुई, यह नागमणि बनती कैसे है...?

       नागमणि स्वाति नक्षत्र में होने वाली बारिश के कारण बनती है। ऐसा माना जाता है कि स्वाति नक्षत्र में होने वाली बारिश की बूंद जब नाग के मॅह में जाती है तब नागमणि बनती है। परन्तु नागमणि का इस प्रकार से बनना भी एक कल्पना मात्र या तार्किक हो सकता है। इसका कोई भी ठोस प्रमाण आज तक नहीं मिला है। परन्तु यह सत्य है कि ज्योतिषशास्त्र ग्रंथ वृहत्ससंहिता में नागमणि के बारे में बताया गया है।

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जानिये दुनिया के सबसे ठण्डे रेगिस्तान और इसकी रहस्यमयी दुनिया को...

   
    नमस्कार दोस्तो, दोस्तो आपने दुनिया के सबसे बडे गर्म रेगिस्तान सहारा रेगिस्तान के बारे में तो सुना ही होगा। लेकिन आज हम आपको बतायेंगे एक ऐसे रेगिस्तान के बारे में जो कि दुनिया का सबसे ठण्डा और विशालतम रेगिस्तान है। दोस्तो यह ठण्डा रेगिस्तान बहुत सारे रहस्यो से भरा पडा है। इस रेगिस्तान के नीचे दबी है एक मानव सभ्यता, आइये जानते है इस ठण्डे रेगिस्तान और इसके रहस्यो के बारे में।
     रेगिस्तान वह मरूक्षेत्र होता है जहाॅ पर बारिश बहुत ही कम सिर्फ नाम मात्र ही होती है या फिर बरसों में ही बारिश होती है। इस लिहाज से सहारा सबसे गर्म रेगिस्तान है। इसी प्रकार अंटार्कटिका सबसे ठण्डा रेगिस्तान माना जाता है। जैसा कि हम जानते है, अंटार्कटिका बर्फ से ढका हुआ है इसलिए यह अत्यधिक ठण्डा क्षेत्र होता है। इन क्षेत्रो में बारिश बहुत ही कम लगभग नही के बराबर होती है इसलिए अंटार्कटिका को ठण्डा रेगिस्तान माना जाता है। उपरोक्त परिभाषा के अनुसार दुनिया में और भी बहुत सारे ठण्डे रेगिस्तान मौजूद है परन्तु अंटार्कटिका सबसे विशालतम और ठण्डा-ठण्डा-कूल-कूल रेगिस्तान है। आइये जानते है इस ठण्डे रेगिस्तान अंटार्कटिका के बारे में कुछ रहस्यमयी और अजीबो गरीब बातें।

     दोस्तो अंटार्कटिका की खोज 1820 में हुई थी। अंटार्कटिका न्यूजीलैण्ड के बाद दुनिया का दूसरा ऐसा क्षेत्र है जहाॅ पर सांपो की कोई भी प्रजाति नही पाई जाती है। अंटार्कटिका में टाइम जोन नही होता है। यहाॅ अब तक अधितम तापतान 14.5 डिग्री मापा गया था। 

     कुछ खोजकर्ताओ का मानना है कि अंटार्कटिका पहले बर्फ से ढका नही रहता था यहाॅ पर एक मानव सभ्यता बसी हुई थी। परन्तु कालान्तर में महाद्वीपो के खिसकने से जलवायु में बदलाव आया जिसके फलस्वरूप यह पूरा क्षेत्र बर्फ से आच्छादित हो गया।

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जानिये कितना कमाती है IPL की चीयरलीडर्स

     नमस्कार दोस्तो, दोस्तो आइपीएल तो खेल ही है रोमांच, मनोरंजन और जश्न का। आइपीएल ही एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां पर खेल, व्यापार और ग्लैमर तीनो एक साथ मिलते है। दोस्तो आइपीएल खेल के साथ साथ ग्लैमर को लेकर भी सुर्खियो में रहती है। दोस्तो आज हम बात करेंगे आइपीएल की चीयरलीडर्स के बारे में। आइपीएल की प्रत्येक मैच में अपनी टीम की उत्साहवर्धन के लिए प्रत्येक टीम के पास अपनी खुद की चीयरलीडर्स की टीम होती है। ये चीयरलीडर्स हर एक चैको और छक्को पर डांस कर अपनी टीम को प्रोत्साहित करने के साथ ही साथ दर्शको का भी मनोरंजन करती है।


   दोस्तो जैसा कि हमने पिछली आर्टिकल में बताया था कि आईपीएल एक बिजनेस है। इस बिजनेस में चीयरलीडर्स भी खूब पैसे कमा रही है। आइये जानते है इन चीयरलीडर्स को एक मैच के कितने पैसे मिलते है इसके अलावा जानेंगे उन अतिरिक्त कमायी के बारे में जो चीयरलीडर्स को अलग से मिलती है। 

    आईपीएल में प्रत्येक फ्रेंचाइजी के पास उनकी अपनी चीयरलीडर्स की एक प्रांफेशनल टीम होती है जो कि विभिन्न देशो से आती है। ये चीयरलीडर्स अमेरिका, ब्रिटेन, मैक्सिको, ब्राजील, फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका जैसे अलग - अलग देशोसे आती है। 

     प्रति मैच मिलने वाली सैलरी तथा बोनस मिलाकर देखा जाये तो केकेआर की चीयरलीडर्स सबसे ज्यादा पैसे कमाती है। सैलरी के मामले में केकेआर की चीयरलीडर्स नं॰ 1 पर स्थित है। पिछली सीजन केकेआर की चीयरलीडर्स को प्रति मैच 12,000रू मिलते थे। मैच जीतने पर चीयरलीडर्स को अतिरिक्त पैसे भी दिए जाते है। इसके अलावा मैगजीन फोटोशुट, पार्टी समारोह में 15,000रू तक अतिरिक्त पैसे मिलते है। केकेआर टीम मैनेजमेंट चीयरलीडर्स की सैलरी प्रतिवर्श एक फीसदी बढा देती है। 

     चीयरलीडर्स की कमायी के मामले में दूसरे नं॰ पर है आरसीबी। पिछली सीजन में आरसीबी की चीयरलीडर्स को एक मैच के 10,000रू मिलते थे। इसके अलावा बोनस, मैगजीन फोटोशुट, मैच के बाद पार्टी से अच्छी खासी रकम मिल जाती थी। 

     इस मामले में मुंबई इंडियंस की टीम तीसरे नं॰ पर है जो कि अपने चीयरलीडर्स को पिछली सीजन प्रतिमैच 8000रू देती थी। इसके अलावा बोनस, मैगजीन फोटोशुट, पार्टी समारोह से भी मोटी रकम मिलती थी। 

     दोस्तो यह थी आईपीएल चीयरलीडर्स की सैलरी दोस्तो अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तो के साथ भी शेयर करिये और हमारे फेसबूक पेज को लाइक करिये ऐसी ही चटपटी आर्टिकल्स के लिए.... 
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जानें कि कैसे IPL टीम के मालिक पैसे कमाते हैं...? | IPL क्रिकेट नहीं, बिज़नेस है

 
        नमस्कार दोस्तो, आज  भी बहुत सारे लोग है जो नहीं जानते की आईपीएल में जब फ्रेंचाइजी पैसे देकर प्लेयर्स खरीदती है  तो फिर उनको प्रॉफिट होता कहा से है...? आईपीएल का बिज़नेस मॉडल क्या है... ? इसीलिए दोस्तों हम इस आर्टिकल में बात करेंगे आईपीएल फ्रेंचाइजी टीम मालिको की इनकम स्रोत के बारे में विस्तार से जानेंगे। दोस्तो आप सभी ने देखा ही होगा जब से आइपीएल की शुरूआत हुई है तब से इसका क्रेज दर्शको में बढता जा रहा है। जब आइपीएल की शुरूआत होती है तब सभी क्रिकेट प्रेमियों एवं पूरे भारत में इसकी पागलपंती अपने चरम सीमा तक पहुँच जाती है। दोस्तो आईपीएल में करोडो का व्यापार चलता है। आइये जानते है यह व्यापार कैसे चलता है और फ्रेंचाइजी मालिक के पास पैसे कहा से आते है और कैसे आते है... ?

     दोस्तो आपको बता दें कि खिलाडियो की नीलामी के लिए प्रत्येक फ्रेंचाइजी मालिक के पास अधिकतम 80 करोड बैलेंस होते है इन्ही पैसो से खिलाडियो को खरीदना होता है। इन खिलाडियो की टीम बनाकर फ्रेंचाइजी मालिक इनकी प्रैक्टिस की भी व्यवस्था करता है इन सब के लिए बहुत सारे पैसे इनवेस्ट करने पडते है। लेकिन हम सभी जानते है कि आइपीएल विनर टीम को सिर्फ 20 करोड ही मिलते है और रनर अप टीम को 12 करोड 50 लाख। आइये जानते है इस स्थिति में भी फ्रेंचाइजी मालिक अपनी इनकम कैसे बढाते है...?

     दोस्तो फ्रेंचाइजी मालिको के इनकम के बहुत सारे स्रोत है जिनमें से कुछ प्रमुख स्रोतो के बारे में आज हम चर्चा करेंगे - 


  • मीडिया राइट्स : आइपीएल लाइव दिखाने के लिए बीसीसीआई टीवी चैनल्स एवं अन्य इन्टरनेट साधनो को मीडिया राइट्स बेचकर मोटी रकम वसूलती है। आइपीएल के शुरूआत में मीडिया राइट्स सोनी पिक्चर्स ने 10 वर्ष के लिए 4000 करोड की मोटी रकम देकर खरीद ली थी। वर्तमान में मीडिया राइट्स स्टार इंडिया के पास है। स्टार इंडिया ने 5 वर्ष के लिए 16350 करोड की बोली लगाकर मीडिया राइट्स ले ली है। यह रकम बीसीसीआई एवं फ्रेंचाइजी मालिक के बीच बांट दी जाती है।

  • टाइटल स्पांसरषिप : दोस्तो आइपीएल की शुरूआत 2008 से हुई थी तब आइपीएल के साथ डीएलएफ टाइटल जुडा हुआ था। 2013 से पेप्सी आइपीएल परन्तु 2016 में टाइटल स्पांसरशीप विवो ने 2199 करोड रू देकर खरीद ली है। यह रकम भी फ्रेंचाइजी मालिक एवं बीसीसीआई में बांट दी जाती है।

  • टिकट : मैच टिकट से जितना पैसा एकत्रित होता है वह पैसा मैच खेलने वाली टीमो एवं आर्गेनाइजर के बीच 20: 80 के अनुपात में बांट दी जाती है।

  • प्राइज मनी : आइपीएल में चैंपियन टीम को 20 करोड एवं रनर अप टीम को 12 करोड 50 लाख रू दिए जाते है। यह रकम फ्रेंचाइजी मालिक एवं खिलाडियो के बीच 50: 50 के अनुपात में बांट दी जाती है। 
  • विज्ञापन : अपनी टीम के  खिलाडियो द्वारा किसी ब्रांड अथवा कंपनी को विज्ञापन द्वारा प्रमोट करने से भी उन्हें ही पैसा मिलता है। दोस्तों हम समझते है की ये पैसे खिलाड़ियों को मिलते है पर ऐसा नही होता है, जब तक आईपीएल चलती है तब तक वो विज्ञापन करते है तो वो पैसे फ्रेंचाइजी को ही मिलते है। 

    दोस्तो इसके अलावा और भी बहुत सारे तरीको से फ्रेंचाइजी मालिक अपनी इनकम स्रोत बढाते है। जैसे जर्सी पर किसी कंपनी अथवा ब्रांड को प्रमोट करना, अपनी टीम के जर्सी और अन्य उत्पाद बेच के। आदि अन्य तरीको से फ्रेंचाइजी मालिक अपने इनकम को बढाती है।

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क्यों चंदन के पेड़ पर रहते हे जहरीले साप...?


          नमस्कार दोस्तो एक बार फिर से स्वागत है आप सभी का दोस्तो आज हम बात करेंगे चंदन के वृक्ष और सर्प के बीच के संबंध के बारे में। इसके अलावा आज हम आपको बतायेंगे सर्प अपनी जीभ बार बार बाहर क्यों निकालता है। दोस्तो अक्सर  आपने देखा होगा या सुना होगा कि चंदन के वृक्ष पर सर्प लिपटे रहते है लेकिन यहाॅ पर सवाल यह बनता है कि सर्प अधिकतर चंदन के वृक्ष पर ही क्यों लिपटे रहते है। आइये जानते है इसके पीछे का मुख्य कारण।

       दोस्तो इस संबंध में बहुत सारे दोहे भी प्रचलित है उदाहरणतया रहीम जी का एक दोहा प्रस्तुत है - 
   जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
   चन्दन विश व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग।।

      बहुत सारे लोगो का मानना है कि सर्प को चंदन की खुश्बू अच्छी लगती है इसलिए सर्प चंदन वृक्ष से लिपटा रहता है। कुछ हद तक यह तथ्य सत्य भी है परन्तु यह मुख्य कारण नही है। जैसा कि दोस्तो हम सभी जानते है कि सर्प के शरीर की बनावट कुछ इस प्रकार है कि उसें ठण्डे एवं नमी वाले स्थानो में रहना पसंद है। इसके विपरित सर्प की शरीर गर्मी के लिए अनुकुलित नही है। इस कारण नमी के कारण सर्प बिल एवं जमीन के अंदर रहते है। और दोस्तो हम सभी जानते है कि चंदन वृक्ष से सर्वाधिक शीतलता मिलती है। इसलिए शीतलता पाने एवं नमी तथा अपने शरीर के तापमान को नियत बनाये रखने के लिए सर्प चंदन के वृक्ष से लिपटे रहते है। ऐसा करने से सर्प के शरीर में ठण्डक बनी रहती है। 

      दोस्तो आपने सर्प को देखते समय यह जरूर गौर किया होगा कि सर्प अपनी जीभ बार बार बाहर निकालते रहता है सर्प ऐसा इसलिए करता है क्योंकि सर्प अपनी जीभ बाहर निकालकर वातावरण का आकलन करता है। अपनी जीभ द्वारा सर्प अपने आसपास की नमी एवं वातावरण का पता लगाता है।

     तो दोस्तो अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तो के साथ भी शेयर करिये और हमारे फेसबूक पेज को लाइक करिये ऐसी ही चटपटी आर्टिकल्स के लिए.... 

         

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“ॐ नमः शिवाय” महामंत्र का अर्थ क्या है ?

 
       नमस्कार दोस्तो स्वागत है आप सभी का आज हम एक महत्वपूर्ण धार्मिक विषय पर चर्चा करेंगे। जैसा कि दोस्तो हम सभी जानते है परंपरागत दृष्टि से भारत में 33 करोड देवी-देवता प्रचलित है। धार्मिक दृष्टि से भारत विश्व का नं १ धर्मष्व देश माना जाता है।

      दोस्तो आज हम बात करेंगे हिन्दुओ में सबसे ताकतवर और शक्तिशाली मंत्र जाप माने जाने वाले एक ऐसे मंत्र जप के बारे में जिसके सुनने बोलने मात्र से ही मन को शांति और सुकुन मिलती है। दोस्तो यह मंत्र पूर्ण रूप से भगवान शिव को अर्पित है। यह मंत्र है “ॐ  नमः शिवाय”। आइये जानते है इस मंत्र का सही अर्थ क्या होता है।

        दोस्तो भारत ही नही अपितु अन्य देशो में भी यह मंत्र प्रचलित है। यह मंत्र शैव सम्प्रदाय से लिया गया है। दोस्तो ॐ  नमः शिवाय का शाब्दिक अर्थ होता है “मै  एक आत्मा भगवान शिव को नमस्कार करता हु”। इस मंत्र का व्याख्यान सीमित शब्दो में नही किया जा सकता क्योंकि इसका अर्थ विस्तृत होता है। दोस्तो इस मंत्र में इतनी शक्ति होती है कि अगर इस मंत्र का जप सही तरीके से किया जाए तो मन को शांति और सुकुन मिलती है। इसीलिए तो दोस्तो किसी भी यज्ञ एवं धार्मिक उत्सवो में इस मंत्र का बार-बार जप किया जाता है। ऋषि मुनियो ने भी इस मंत्र का उच्चारण करके ध्यान केंद्रित किया एवं सिध्दि प्राप्त की। ध्यान केंद्रित करने के लिए इसी मंत्र को सबसे उत्तम माना गया है।

       दोस्तो अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तो के साथ भी शेयर करिये और हमारे फेसबूक पेज को लाइक करिये ऐसी ही चटपटी आर्टिकल्स के लिए....




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आखिर यहाॅ पक्षियाॅ आत्महत्या क्यों करती है....?

       
          दोस्तो आज हम एक अनोखी और विचित्र घटना के बारे में बात करेंगे जो कि आजतक अनसुलझा हुआ है। आज हम जानेंगे एक अनसुलझे हुए रहस्य के बारे में।
       
         दोस्तो आसाम के गुवाहाटी से 330 किलोमीटर दूरी पर जाटिंगा घाटी है जो कि पक्षियो की सुसाइड पाॅइंट माना जाता है। ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि यहाॅ पिछले 100 वर्षो से प्रतिवर्ष 40 अलग - अलग प्रकार की पक्षियो की मृत्यु अज्ञात तरीके से हो जाती है। अनेक पक्षीविदो का कहना है कि पक्षियो में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति नही होती। इससे स्पष्ट होता है कि इस घाटी  की किसी विषिष्ट परिस्थिति के कारण ही ऐसा होता होगा। आइये जानते है आखिर इन पक्षियो की मृत्यु किन कारणो से होती है।

         मशहूर पक्षीविद डाॅ सलीम अलि एवं अन्य पक्षीविदो का कहना है कि वर्षा ऋतु के पश्वात् सितंबर एवं अक्टूबर के महीनो में शाम के समय यह इलाका कोहरानुमा एवं अंधेरा हो जाता है जिस कारण कई पक्षियाॅ रोशनी के खंभो के ईर्द - गिर्द आकर गिर जाते है अथवा चेतना शून्य होकर पेड पर बैठ जाते है। पक्षियो का होश नही रहता कि वे स्थानीय आदिवासियों द्वारा पकडे जा रहे है। जाटिंगा के इस स्थान को “पक्षियो द्वारा सामूहिक आत्महत्या की घाटी” भी कहा जाता है। 

        परन्तू यह बता दूॅ कि विभिन्न पक्षियो की इस विचित्र एवं रहस्यमय व्यवहार के कारणो का सही पता पक्षीविद भी नही लगा पाये है। 

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क्या सच में यह खूबसूरत देश सागर में डुब जायेगा..?

     
       दोस्तो आज हम चर्चा करेंगे एक ऐसे देश के बारे में जिस पर सागर में डुब जाने का खतरा मंडरा रहा है। दोस्तो आइलैण्ड शब्द तो आपने सुना ही होगा, ऐसी जगह जो चारो ओर से जल स्तरो से घिरा रहता है आइलैण्ड कहलाता है। दोस्तो आज हम बात करेंगे एक ऐसे ही आइलैण्ड देश की जिस पर भविश्य में समुद्र में डुब जाने का खतरा मंडरा रहा है। तो आइये दोस्तों जानते है कोनसा है वो खूबसूरत देश जो भविष्य में डूब जायेगा...?

         दोस्तो हम बात कर रहे है एशिया के सबसे छोटे देश मालदीव के बारे में जो कि जनसंख्या एवं क्षेत्र दोनो ही प्रकार से एशिया का सबसे छोटा देश है। मालदीव में 1192 टापू है जिसमें लगभग 200 के करीब बस्तियाॅ मौजूद है। मालदीव को सपनो का देश भी कहा जाता है कयोकि इस देश की खूबसूरती इतनी है की हर साल इस देश में लगभग १.५ मिलियन से २ मिलियन लोग अपने रोमांटिक सपनो को पूरा करने यहाँ आते है। 

       दोस्तो मालदीव जैसे देश के भविश्य में डुब जाने की आशंका का प्रमुख कारण ग्लोबल वार्मिंग है। जी हां दोस्तो ग्लोबल वार्मिंग से पृथ्वी का तापमान लगातार बढ रहा है जिससे ग्लेशियर व ठंडे प्रदेशो के बर्फ लगातार पिघल रहे है। तापमान के बढने के कारण ग्लेशियर एवं बर्फ लगातार पिघल रहे है जिससे सागर के आयतन में लगातार वृध्दि हो रही है। इन्हीं सब कारणो के कारण मालदीव जैसे देशो के ऊपर भविश्य में सागर में डुब जाने का खतरा मंडरा रहा है। मालदीव की सरकार सागर में डुब जाने की आशंका से अपने नागरिको को सुरक्षित रखने कें लिए अन्य देशो में जमीन खरीदना भी शुरू कर दिया है। 

    दोस्तो मालदीव ही नही पृथ्वी पर ऐसे बहुत सारे देशऔर भी है जो इस संकट से रूबरू है। दोस्तो अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तो के साथ भी शेयर करिये और हमारे फेसबूक पेज को लाइक करिये ऐसी ही चटपटी आर्टिकल्स के लिए......  
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६ मिस कॉल के जरिये चुराये गए १.८६ करोड रुपये

    
        दोस्तों हम आज आपको एक ऐसी घटना के बारे में बताने जा रहे है जो आपको चौका देगी। हमारे में से शायद बहुत काम लोग होंगे जो उनके मोबाइल में अगर कोई मिस कॉल आये तो सामने से कॉल न करते होंगे, क्युकी आज सब के पस जिओ का सिम है तो सरे लोग मिस कॉल आये हुए कॉल पर कॉल बैक करते है।  अगर आप भी मिस कॉल आने पर सामने से कॉल करते है तो आज ही बंध कर दीजिये क्योकि एक कॉल से आप अपनी सारी बचाई हुई कमाई किसी और के अकाउंट मे ट्रांसफर हो सकती है। आप आश्वर्य में होंगे की ऐसे कैसे हो सकता है तो आइये हम आपको एक घटना बताते है जिस से मिस कॉल आने के बाद सामने से कॉल करने के बाद उसकी सारी कमाई किसी और के अकाउंट में ट्रांसफर हो गयी।

     ये घटना मुंबई के एक बिजनेसमैन के साथ तब हुई जब उसके मोबाइल पर २७-२८ दिसंबर की रात को उसके मोबाइल पर ६ मिस कॉल आने के बाद उसके अलग अलग अकाउंट से १.८६ करोड़ रुपये गायब हो गए।  उस मुंबई के बिजनेसमैन का नाम वी. शाह है। 

        उनके मोबाइल पर २७ दिसंबर की रत को २ बजे +४४ कोड वाले नंबर से ६ मिस कॉल आये थे तो उन्होंने २८ दिसंबर की सुबह उस नंबर पर सामने से कॉल किया तब उन्हें पता चला की उनका खुद का सिम कार्ड बंध  हो गया है।  आपको बता दे की +४४ कोड ब्रिटेन का है।  
    
        उसके बाद जब वो बैंक में गए तब पता चला की उनके अकाउंट में से १.८६ करोड रुपये गायब है और वो पैसे अलग अलग १४ एकाउंट्स में २८ ट्रांसक्शन के जरिये ट्रांसफर किये गए थे। बैंक की कोशिशो के बाद भी वो सिर्फ २० लाख रुपये ही वापस ला पाए और अब बाकि के पैसे नहीं मिल पाएंगे। 
        
        जाँच में पता चला की २७ दिसंबर की रात  को ११:१५ बजे उनके मोबाइल से नए सिमकार्ड के लिए आवेदन किया गया और रात  को उनके नंबर पर लगातार ६ मिस कॉल आये।  जाँच में ये भी पता चला की उनका नंबर बंध हो गया था वो उनकी ही शिकायत पर उनका नंबर ब्लॉक किया गया था।   

       आपको बता दे की असल में ये पूरा मामला सिम कार्ड स्वेपिंग का है।  पुलिस के मुताबिक हैकर्स के पास  उनके  सिम कार्ड की पूरी डिटेल्स थी। 

       वैसे ये मामला मिस कॉल का जवाब देने का नहीं है , क्योकि उनका मोबाइल साइलेंट था और उन्होंने मिस कॉल वाले नंबर पर कॉल भी नहीं किया था।  साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक हैकर्स को उनके अकॉउंट के बारे जानकारी एक सॉफ्टवेयर के जरिये मिली थी। हालां की आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है मिस कॉल आने पर अनजान नंबर हो तो कॉल बैक ना ही करे। 

      दोस्तों ऐसे ही इंटरेस्टिंग आर्टिकल्स के लिए हमारा फेसबुक पेज को लिखे करे और इस आर्टिकल्स को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि किसी के साथ शाह जैसा धोखा न हो....  

Source : Roz Buzz 

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माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स

     
           दोस्तो आज हम बात करेंगे माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स के बारे में। दोस्तो माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स लडकियाॅ थी।

      माउण्ट एवरेस्ट दुनिया की सबसे ऊॅंची पर्वत शिखर है। माउण्ट एवरेस्ट की ऊॅंचाई 8848 - 8850 मीटर है। यह पर्वत नेपाल में स्थित है स्थानीय लोगो में यह सागरमाथा के नाम से प्रचलित है। माउण्ट एवरेस्ट में हवा की रफ्तार 321 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुॅच सकती है। माउण्ट एवरेस्ट चढाई करते समय अब तक 250 से भी अधिक लोगो की जान जा चुकी है।  माउण्ट एवरेस्ट में करीब 150 मृत लोगो की खुली कब्र भी मौजूद है। वैज्ञानिक सर्वेक्षणो में यह भी माना जाता है कि यह पर्वत आज भी 4 मिलीमीटर प्रति वर्ष  की रफ्तार से लगातार वृध्दि कर रही है।

        यह पर्वत शिखर पर्वतारोहियों के लिए हमेशा  से ही आकर्षण का केन्द्र रही है। माउण्ट एवरेस्ट में 8000 मीटर की ऊॅचाई पार करते ही खतरा और भी बढ जाता है। 8000 मीटर ऊॅचाई को माउण्ट एवरेस्ट का डेथ जोन भी माना जाता है।

      ऐसी विकट परिस्थिति में 19 मई 2013 को सुबह भारतीय मुल्क की दो जुडवा बहनों ने माउण्ट एवरेस्ट फतह कर दिखाया था। ये जुडवा बहने हरियाणा की रहने वाली थी। ये जुडवा बहने थी नुंग्शी मलिक तथा ताशी  मलिक जिनकी उम्र उस वक्त 22 वर्श थी। माउण्ट एवरेस्ट फतह करने से पहले ये ट्विन्स दुनिया की अन्य पर्वत शिखरो को भी फतह कर चुकी है। दोस्तो हमें गर्व होना चाहिए कि ये दोनो लडकियाॅ भारतीय मुल्क की है। 
       
          प्राउड टू बी एन इंडियन..... 

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जानिए ऐसे पेड़ के बारे में जो देता है ४० अलग अलग फल


          दोस्तो आज हम आपको एक मजेदार और रोचक जानकारी देने वाले है। दोस्तो बचपन में आपने ऐसी बहुत सारी कहानी या कविताऐ  सुनी होगी जिसमें कहा जाता था कि एक ही वृक्ष में तरह - तरह के फल लगे हुए है जैसे कि आम के वृक्ष में आम के फल के अलावा बेर, आलू बुखारा, चेरी आदि अनेक फल लगे हुए है। यह सब अटपटी बाते हमे सिर्फ कहानी और किताबो में पडने - सुनने को मिलता था लेकिन विज्ञान ने इन कहानी और कविताओ की बातो को सत्य साबित कर दिया है। जी हां दोस्तो विज्ञान और तकनीकी की बदौलत यह संभव है कि अब एक ही वृक्ष से अनेक प्रकार के फल प्राप्त किए जा सकते है। आइये जानते है यह कैसे संभव है।

    कवि श्री प्रसाद जी ने लिखा है -
    पौधा तो जामुन का ही था
   लेंकिन आये आम,
  पर जब खाया, तब यह पाया
  ये तो है बादाम

         दोस्तो ऐसी काल्पनिक कविताऐ आज विज्ञान की बदौलत सत्य साबित हो रही है। साइराक्यूज विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदस्थ एक अमेरिकी प्रोफेसर जिसका नाम सैम वैन ऐकेन है ने ईडन प्रोजेक्ट के तहत एक ऐसा वृक्ष बनाया है जो सामान्य वृक्षो से बिल्कुल अलग है क्योंकि यह एक वृक्ष 40 प्रकार के फल दे सकता है।  आइये जानते है प्रोफेसर ऐकेन ने इस काल्पनिक सोच को सत्य में कैसे परिवर्तित किया। इस वृक्ष को ऐकेन ट्री के नाम से जाना जाता है। 

              प्रोफेसर ऐकेन और विज्ञान के अनुसार जब पेड नवयुवा अवस्था में हो तो उसकी एक शाखा  तोडकर ज्वाइंट वाले स्थान को खुरचकर छोटा गड्ढा बनाकर इसमें दूसरे युवा वृक्ष की बडी ताजी कलम डालकर उस स्थान को पट्टियो से बांध  दो। कुछ समय पपश्यात  यह कलम आपस में जुड जायेगी। यही क्रम अन्य फलीय वृक्षो की कलम काटकर बार बार दोहराते जाओ। परन्तु ध्यान रहे की यह सफलता सिर्फ गुठली वाली फलो में मिली है। गुठली वाली फल जैसे चेरी, आलू बुखारा, आडू, खुबानी तथा आदि अन्य गुठली वाले फल है।  

             तो दोस्तो अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तो के साथ भी षेयर करिये और हमारे फेसबूक पेज को लाइक करिये ऐसी ही चटपटी आर्टिकल्स के लिए....... 


     

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