हमे छोड़कर चले गए चंचल गौरैया, जानिए इसके पीछे का रहस्य...

    नमस्कार दोस्तो, दोस्तो इस संसार में लाखो प्रजाति की पक्षियाॅ पाई जाती है। ये पक्षियाॅ दिखने में सुंदर और आकर्षक होती है। दोस्तो आज हम बात करेंगे इन्हीं पक्षियो में से एक ऐसी पक्षी के बारे में जो कि इन्सान प्रेमी है। जी हां दोस्तो गौरैया एक ऐसी चिडियाॅ है जो इन्सानो के साथ रहना पसंद करती है। ये नन्हीं गौरेया ज्यादातर बस्तियों एवं घरो में अपना घोशला बनाती है। आश्वर्यजनक बात यह है कि पिछले कुछ वर्षो से इनकी संख्या में 60 फीसदी तक कमी हो चुकी हैं। ये चिडियाॅ आज के आधुनिक वातावरण के अनुरूप अपने आप को ढाल नहीं पा रही है। इस कारण इसकी संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। आइये दोस्तो जानते है इस नन्हीं गौरेया पक्षी के बारे में एवं इसकी संख्या में कमी होने के पीछे का कारण।
 नन्हीं एवं आकर्षक  गौरैया : 

    गौरैया इन्सानो की सबसे करीबी पक्षियों में से एक होती है। ये हमेशा इन्सानो के करीब रहना पसंद करती है एवं अपना घोशला भी इन्सानी बस्ती एवं घरो में बनाती है। छोटी - सी दिखने वाली इस पक्षी की लम्बाई 15 सेमी तक होती है। इनका पूरा जीवनकाल 2 वर्षो का होता है इस दौरान ये 5 - 6 अण्डे देती है। नन्हीं सी दिखने वाली ये गौरैया लगभग 25 - 35 ग्राम वजनी होती है। ये ज्यादातर समूहो में रहती है तथा घरो के आसपास आसानी से पायी जाती है। परन्तु दोस्तो दुख की बात यह है कि ये सुंदर गौरैया अब विलुप्त होने की कगार पर है।

    दोस्तो इस चिडिया की संख्या इतनी कम हो गयी है कि अब इन्हें संरक्षण की आवश्यकता है। इनके संरक्षण के लिए इन्हे रेड लिस्ट में डाल दिया गया  है। दोस्तो दुख तो उस समय होगा जब बचपन से देखते आ रहे ये चंचल नन्हीं गौरैया पक्षी इस धरती से पूरी तरह विलुप्त हो जायेगी। दोस्तो आप सभी से निवेदन है कृप्या इस चंचल गौरैया पक्षी की संरक्षण में अपना योगदान जरूर देवें। क्योंकि दोस्तो सरकार तो सिर्फ योजनाए चला सकती है इन योजनाओं को सफल या असफल बनाना हम सभी पर निर्भर करता है। दोस्तो आशा है आप सभी इस सुंदर गौरेया की रक्षा करेंगे। आइये जानते है इस चिडियाॅ की विलुप्तिकरण के कुछ कारण।

    दोस्तो गौरैया अत्यंत संवेदनषील पक्षी है। चूॅकि आज का तापमान ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ गया है इस कारण इन पक्षियो पर बढते हुए तापमान का प्रतिकूल प्रभाव पड रहा है। अत्यधिक तापमान की वजह से इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। इसके अलावा दोस्तो प्रत्येक जगह पर टाॅवर एवं रेडिएशन की अधिकता की वजह से इनकी संख्या में लगातार कमी होती जा रही है।

    दोस्तो ये गौरैया पक्षी मिट्टी के ठण्डे मकानो में अपना घोषला बनाते है परन्तु शहरीकरण एवं पक्के मकानो के निर्माण के कारण इनका आवास स्थान भी प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा और भी अनेको कारण है जिससे इनकी संख्या लगातार घट रही है।

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