• जानिये फांसी देने के पूर्व कैदी के कान में जल्लाद क्या कहता है... ईनाम...

    नमस्कार दोस्तो आज हम आपको ले जायेंगे एक ऐसे रहस्य की ओर जिसको आप भी जानना चाहेंगे, दोंस्तो अक्सर आपने फिल्मो मे देखा होगा या कहीं से सुना होगा की किसी अपराधी को फंासी पर चढाने के पूर्व जल्लाद कैदी के कानो मे कुछ कहता है। तो दोस्तो आज हम आपको इस रहस्य से वाकिफ कराना चाहेंगे । नको ईनाम भी दिया जाता है।

  • माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स

    दोस्तो आज हम बात करेंगे माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स के बारे में। दोस्तो माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स लडकियाॅ थी।

  • जानिए दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान कौन था...

    नमस्कार दोस्तो, हर कोई जानना चाहता है की दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान तो आइये आज हम जानते है हमारे अस्तित्व के बारे मे, आइये जानते है हमारे इतिहास को । इसके अलावा आज हम आपको बतायेंगे उस महिला के बारे मे जिसने दुनिया पर पहली बार बच्चा पैदा किया।

तो क्या हनुमान जी से जुड़ा है बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य!


       नमस्कार दोस्तो, जैसा कि हम सभी जानते है यह पूरी दुनिया विभिन्न प्रकार के रहस्यो से भरी पडी है। दोस्तो आज हम बात करेंगे एक ऐसी खतरनाक जगह के बारे में जिसका नाम है बरमुडा ट्रायंगल जो कि आज भी अनलसुलझा हुआ रहस्य है।  बरमुडा ट्रायंगल बहुत ही खतरनाक जगह मानी जाती है जो कि समुद्र में स्थित है। इस ट्रायंगल से होकर गुजरने वाली जहाज इस बरमुडा ट्रायंगल में समा जाती है और उस जहाज के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी भी प्राप्त नही हो पाती, यहां तक की उसका मलबा भी प्राप्त नही होता। इस बरमुडा ट्रायंगल पर कंम्पास (दिशासूचक) भी काम करना बंद कर देता है। बरमुडा ट्रायंगल में पिछले दों शताब्दी से 50 से ज्यादा जहाज, 20 से ज्यादा एयरक्राॅफ्ट और 1000 से भी ज्यादा लोग लापता हो चुके है। आइये जानते है इस रहस्यमयी जगह के बारे में कुछ और बातें।

     बरमुडा ट्रायंगल के बारे में सबसे पहले क्रिस्टोफर कोलम्बस ने बताया। बरमुडा ट्रायंगल अमेरिका के फ्लोरिडा, मियामी शहर एवं प्यूर्टोरिका से मिलकर बना एक समुद्री त्रिभुज है। इस जगह को डेविल्स ट्रायंगल भी कहते है। बरमुडा ट्रायंगल की उत्पत्ति बहुत बडा रहस्य बना हुआ है, वैज्ञानिको एवं शोधकर्ताओ ने इसके संबंध में अनेक परिभाषा ए दी है। 

      कुछ वैज्ञानिको का मानना है कि यह बरमुडा ट्रायंगल दूसरे ग्रहो से आए लोगो का इलाका है जबकि कुछ वैज्ञानिक बरमुडा ट्रायंगल को टाइम पोर्टल से जोडते हैं। हालाॅकि अमेरिकी सेना इस प्रकार के किसी भी त्रिभुज को नहीं मानती। 

 वैज्ञानिको के अनुसार ....
      वैज्ञानिको का मानना है कि इस बरमुडा ट्रायंगल के समुद्री तट में मीथेन हाइड्राइड नामक रसायन बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। जब यह रसायन फटता है तब इससे बहुत शक्तिशाली बुलबुले निकलते है जो किसी भी जहाज को डुबाने के लिए काफी है।

   1925 में कोटोपैक्सी नामक स्टीमर जहाज कै. डब्ल्यू. जे. मेयर और 32 क्रू मेंबर के साथ रवाना हुआ था। सिर्फ दों दिन बाद यह जहाज बरमुडा ट्रायंगल की चपेट में आकर गायब हो गया और करीब 90 साल बाद यह जहाज पश्विमी हवाना में पाया गया। क्यूबा के तटरक्षको ने जब इस जहाज को देखा तब वे लोग भी हैरान रह गए क्योंकि इस जहाज का अस्तित्व तो 90 साल पहले बरमुडा ट्रायंगल में खत्म हो गया था। इस जहाज के कारण कई सवाल उठे कि अगर वाकई में मीथेन हाइड्राइड नामक रसायन जहाजो को चपेट में ले लेता है तो यह जहाज कैसे बच गया। सबसे बडी बात इसके 32 क्रू मेंबर कहां गए यह अभी तक रहस्य बना हुआ है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार....
       कुछ लोग बरमुडा ट्रायंगल को पौराणिक मान्यता से जोडते है। रामायण में एक घटना प्रचलित है जिसके अनुसार हनुमान जी माता सीता की खोज के लिए जब लंका पार जा रहे थे तब उसके मार्ग पर एक राक्षसी जिसका नाम सिंघनी था आ गयी और हनुमान जी की परछाई पकडकर उन्हें मारने का प्रयास करने लगी परन्तु बदले में हनुमानजी उनका वध कर देते है। उस राक्षसी को वरदान था कि वह आसमान में उडने वाली किसी भी परछाई को पकडकर उसका शिकार कर सकती थी। कहा जाता है उस राक्षसी की शक्तियाॅ ही बरमुडा ट्रायंगल में कैद है और उसी के कारण ऐसा होता है। 

      दोस्तो बरमुडा ट्रायंगल के बारे में यह सभी बातें सही है या गलत इसका हम किसी भी प्रकार से समर्थन नही करतें क्योंकि एक तरफ पौराणिक मान्याताएं व वैज्ञानिक शोध है वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेना बरमुडा ट्रायंगल जैसी किसी भी त्रिभुज को नहीं मानती।   
    
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महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने बीमारी को बताया था अपनी सफलता का राज | स्टीफन हॉकिंग का जीवन परिचय

     नमस्कार दोस्तो, मैं जनता हु की, पिछले कुछ समय से आप आर्टिकल्स की इंतजार रहे थे किन्तु मैं स्टडी और एग्जाम्स में बिजी था तो आज में काफी दिनों के बाद आज आर्टिकल लिख रहा हु और अब से आपको नियमित आर्टिकल्स मिलते रहेंगे ।

      दोस्तो आज हम बात करेंगे दुनिया के महान वैज्ञानिको में से एक स्टीफन हाॅकिंग के बारे में। स्टीफन हाॅकिंग को अल्बर्ट आइंस्टीन  के बाद  दूसरा सबसे सफल वैज्ञानिक माना जाता है। स्टीफन हाॅकिंग ने पुराने इलेक्ट्रानिक हिस्सो का उपयोग करके कम्प्यूटर बना दिया था। शारीरीक रूप से 95 फीसदी विकलांग होने के बाद भी स्टीफन हाॅकिंग ने ब्रम्हाण्ड के संबंध में बिग बैंग, ब्लैक होल जैसी अनेक सिध्दांतो पर प्रकाश डाला । स्टीफन हाॅकिंग को कभी भी ठीक न होने वाली बीमारी थी। इसके बावजूद स्टीफन हाॅकिंग ने दूसरे सबसे सफल वैज्ञानिक की उपाधि प्राप्त की। आइये जानते है स्टीफन हाॅकिंग की कुछ उपलब्धियॅा तथा उनका जीवन सफर।
   
    स्टीफन हाॅकिंग का जन्म 8 जनवरी 1942 को इंग्लैंड के  ओंक्सफोर्ड में हुआ था। इस समय द्वितीय विश्व युध्द चल रहा था। इनके पिता फ्रेंक हाॅकिंग चिकित्सक थे। 
 
     स्टीफन हाॅकिंग शारीरीक रूप से विकलांग थे। इनको न्यूराॅन मोटर नामक कभी न ठीक होने वाली बीमारी थी। इस बीमारी की वजह से स्टीफन हाॅकिंग का बाॅया हिस्सा काम करना बंद हाक गया था अर्थात पैरालाइज हो गया था। इसके साथ ही इन्होने लिखने की क्षमता भी खो दी। सन् 1958 में स्टीफन हाॅकिंग ने बोलने की शक्ति भी खो दी। चिकित्सको ने स्टीफन हाॅकिंग को बाकी का जीवन व्हीलचेयर पर बिताने की सलाह दी। इनका व्हीलचेयर कम्प्यूटरीकृत था। इनके व्हीलचेयर पर स्विफ्ट की बोर्ड तथा इन्टेल द्वारा विशेश उपकरण लगाये गये थे जो स्टीफन हाॅकिंग की मस्तिश्क पेशियाए गाल पेशियो तथा हाथ की पेशियो द्वारा उत्पन्न उद्दीपनो को प्राप्त कर एक स्क्रीन द्वारा आउटपुट प्रदान करते थे। इस तरह स्टीफन हाॅकिंग बात करते थे।
   
     स्टीफन हॉकिंग ऐसे वैज्ञानिक थे जो दुनिया को अलग नजरिये से देखते थे।  उन्होंने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा था की उनकी बीमारी ने उन्हें वैज्ञानिक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की थी क्योकि बीमारी से पहले उन्होंने अपनी पढाई पे ध्यान कभी नहीं दिया था लेकिन बीमारी के बाद जब उन्हें  ऐसा लगने लगा की अब वो ज्यादा समय तक जिन्दा नहीं रह सकते उसके बाद उन्होंने अपना सारा ध्यान रिसर्च पे केंद्रित कर दिया।
   
      इतनी विकट परिस्थितियो के बाद भी स्टीफन हाॅकिंग ने हार नही मानी ब्रम्हाण्ड से संबंधित बिग बैंग सिध्दांत और ब्लैक होल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। ब्लैक होल से संबंधित इनका “हाॅकिंग रेडियेशन” सिध्दांत सुप्रसिध्द रहा है। 
   
     चिकित्सको ने कहा था स्टीफन हाॅकिंग अधिक से अधिक 2 वर्षो तक जीवित रह सकते है। लेकिन स्टीफन हाॅकिंग 50 वर्षो से भी अधिक वर्षो तक जीवित रहे। 14 मार्च 2018 को सुबह 76 वर्श की उम्र में स्टीफन हाॅकिंग का निधन हो गया।
   
      दोस्तों,आपको बता दे की स्टीफन हॉकिंग ने कुछ किताबे भी लिखी है उनमे से उनकी महत्वपूर्ण किताबे है :
  • ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ़ टाइम 
  • द ग्रैंड डिज़ाइन 
  • थ्योरी ऑफ़ एवरीथिंग 
  • द यूनिवर्स इन अ नुत्सेल 
  • माय ब्रीफ हिस्ट्री  
   स्टीफन हाॅकिंग कहते थे... 
      “जिन्दगी में कुछ करने के लिए कोई बहाने की जरूरत नही है, बस कुछ करने की चाह होनी चाहिए और खुद पे विश्वाश ”
     “हाॅलाकि मै चल नहीं सकता और कम्प्यूटर का सहायता से बात करनी पडती है, लेकिन अपने दिमाग से मैं आजाद हूॅ।”
     “मृत्यु निष्चित है, लेकिन जन्म और मृत्यु के बीच कैसे जीना चाहते है वह हम पर निर्भर है।”

      दोस्तों मैं उम्मीद करता हु की आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा, अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया है तो हमारे फेसबुक पेज को लाइक करिये ऐसे ही चटपटी खबरे पाने के लिए और ये आर्टिकल अपने सारे दोस्तों के साथ शेयर करिये... 
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