• जानिये फांसी देने के पूर्व कैदी के कान में जल्लाद क्या कहता है... ईनाम...

    नमस्कार दोस्तो आज हम आपको ले जायेंगे एक ऐसे रहस्य की ओर जिसको आप भी जानना चाहेंगे, दोंस्तो अक्सर आपने फिल्मो मे देखा होगा या कहीं से सुना होगा की किसी अपराधी को फंासी पर चढाने के पूर्व जल्लाद कैदी के कानो मे कुछ कहता है। तो दोस्तो आज हम आपको इस रहस्य से वाकिफ कराना चाहेंगे । नको ईनाम भी दिया जाता है।

  • माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स

    दोस्तो आज हम बात करेंगे माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स के बारे में। दोस्तो माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स लडकियाॅ थी।

  • जानिए दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान कौन था...

    नमस्कार दोस्तो, हर कोई जानना चाहता है की दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान तो आइये आज हम जानते है हमारे अस्तित्व के बारे मे, आइये जानते है हमारे इतिहास को । इसके अलावा आज हम आपको बतायेंगे उस महिला के बारे मे जिसने दुनिया पर पहली बार बच्चा पैदा किया।

अमेरिका ने क्यों गिराया था जापान पर परमाणु बम...?

      युद्ध की स्थिति इतनी दुखद और विनाशकारी होती है कि चाहे कोई भी देश जीते या हारे नुकसान तो दोनों पक्षों का होता है। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान एक ऐसा ही भयानक मंज़र देखने को मिला जब अमेरिका ने जापान के दो प्रमुख शहरों हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम से हमला किया था। इन दोनों शहरों में हुई बमबारी से जापान को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ और उनके बहुत सारे सैनिकों सहित 2 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। दोस्तों प्रश्न यह बनता है कि अमेरिका ने आखिर जापान के इन दोनों शहरों को ही क्यों चुना और ऐसी क्या वजह थी जिसके कारण अमेरिका को इतने खतरनाक परमाणु बम का सहारा लेना पड़ा ?  आइए दोस्तों जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब और इस बमबारी से संबंधित कुछ रोचक बातें।



      द्वितीय विश्वयुद्ध की यह लड़ाई दो समूहों के बीच थी। पहले समूह एक्सिस पावर जिसमें जर्मनी, इटली, जापान, हंगरी जैसे और भी बहुत सारे देश शामिल थे। वहीं दूसरी ओर एलाइड पावर में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और बहुत सारे देश शामिल थे। हिटलर की मृत्यु हो जाने से जर्मनी की नाज़ी सेना कमजोर हो गई और आत्मसमर्पण कर गई। जर्मनी के युद्ध से हट जाने से एक्सिस पावर एलाइड पावर की तुलना में कमजोर होने लगी। हालांकि जापान जैसी मजबूत देश अभी भी एक्सिस पावर में थी। परंतु जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया जापान की शक्तियां भी कमजोर होने लगी। फिर भी जापान के राजा हीरोहीतो आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि हम अपनी आखरी सैनिक तक लड़ेंगे और हार नहीं मानेंगे। इस तरह द्वितीय विश्व युद्ध लगातार चलता रहा और दोनों पक्षो को नुकसान होता रहा। ऐसी स्थिति में जापान को रोकने और द्वितीय विश्व युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका को कुछ बड़ा कारनामा करना था। 16 जुलाई 1945 को अमेरिका ने परमाणु बम बनाकर उसका सफल परीक्षण भी कर लिया। इसी समय जापान भी ऑपरेशन डाऊनफाल के नाम से अमेरिका पर बड़ा हमला करने की तैयारी में था। इसकी खबर अमेरिका के राष्ट्रपति हैरी ट्रूमन को मिली तो उसने अपने देश के बड़े अधिकारियों से मिलकर जापान पर परमाणु हमले की तैयारी शुरू कर दी।

     परमाणु हमला करने से पहले देश को किसी दूसरे देश से सहमति लेनी पड़ती है इसलिए अमेरिका ने यूनाइटेड किंगडम से परमाणु हमले की सहमति ले ली।

  पहला परमाणु हमला :
       6 अगस्त 1945 को 8:45 में अमेरिका ने एयरक्राफ्ट द्वारा जापान के हिरोशिमा में बम गिरा दिया। इस बम को एयरक्राफ्ट से जमीन पर पहुंचने में कुल 44 सेकंड लगे थे। इस बम का नाम "लिटिल ब्वॉय" रखा गया था। इस परमाणु हमले से हिरोशिमा के लगभग 80,000 लोग मारे गए। चूंकि जापान का यह हिरोशिमा शहर सैनिक महत्व वाला था इस कारण यहां पर सर्वप्रथम परमाणु हमला किया गया। इस परमाणु हमले से हिरोशिमा की लगभग 30% आबादी खत्म हो गई।

  दूसरा परमाणु हमला :
      9 अगस्त 1945 को 11:02 पर अमेरिका ने जापान के नागासाकी पर एक और परमाणु हमला कर दिया। हालांकि यह दूसरा परमाणु बम जापान के औद्योगिक शहर कोकुरा में गिराना था परंतु खराब मौसम की वजह से यह दूसरा बम नागासाकी में ही गिराना पड़ा। यह दूसरा परमाणु बम नागासाकी की जमीन से 500 फीट ऊपर ही फट गया। आसपास पहाड़ होने की वजह से इस दूसरे बम का प्रभाव उतना ना रहा जितना की खतरनाक प्रभाव हिरोशिमा पर गिराए गए बम का था। इस दूसरे परमाणु बम का नाम "फैट मैन" रखा गया था। इस दूसरे परमाणु हमले से 40,000 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी इसके अलावा रेडिएशन की वजह से और भी अनेक लोग मारे गए।

     हिरोशिमा एवं नागासाकी में हुए इस परमाणु हमले के बाद जापान के राजा हीरोहीतो ने 14 अगस्त 1945 को अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। ऐसा कहा जाता है कि अगर जापान अभी भी आत्मसमर्पण नहीं करता तो जापान पर एक और तीसरा परमाणु हमला अमेरिका 19 अगस्त को करने वाला था।

    1945 में जापान के हिरोशिमा एवं नागासाकी पर हुए इन दो खतरनाक परमाणु हमले के बाद भी 1964 में जापान ने विश्व खेल जगत की सबसे बड़ी इवेंट टोक्यो ओलंपिक की मेजबानी की थी। दोस्तों अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कीजिए और हमारे फेसबुक पेज को लाइक कीजिए ऐसे ही चटपटी, रहस्यमयी मजेदार आर्टिकल्स के लिए......


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ऐसी पुस्तक जिसे नाही कोई समझ पाया और नाही कोई पढ़ पाया...

यूं तो दोस्तों इस दुनिया में बहुत सारे सुलझे . अनसुलझे रहस्य मौजूद है परंतु दोस्तों आज हम आपको बताएंगे एक ऐसी रहस्यमयी किताब के बारे में जिसके रहस्य को आज तक कोई नहीं सुलझा सका। इस रहस्यमयी किताब का नाम है वायनिक मनुस्क्रिप्ट। इस किताब को वायनिक पांडुलिपि भी कहा जाता है। इस किताब में लिखी हुई लिपि इतनी रहस्यमयी है कि आज तक कोई भी लिपि विद्या जानने वाला या कोई भी व्यक्ति इस किताब को पढ़ या समझ नहीं पाया। माना जाता है कि इस रहस्यमयी किताब के अंदर प्राचीन इतिहास एवं खगोल शास्त्रए आयुर्वेदए जादूगरी जैसे बहुत सारे रहस्य छुपे हो सकते है। आइए दोस्तों जानते हैं इस रहस्यमयी किताब के बारे में कुछ महत्वपूर्ण एवं रोचक बातें।


      वायनिक मनुस्क्रिप्ट नामक यह रहस्यमयी किताब 600 वर्ष पूर्व 15 वीं सदी में लिखी गई थी। इस किताब के लेखक रोजर बेकॅन को माना जाता है। यह किताब 240 पन्नो की है। इस 240 पन्नो में से अभी तक एक अक्षर को भी नहीं समझा जा सका हैं। इस किताब की पन्ने चमड़े के बने हुए हैं। इसके पन्ने एवं स्याही की कार्बन डेटिंग पद्धति द्वारा अध्ययन करने पर पता चला है कि यह किताब 15वीं सदी में लिखी गई थी। इस किताब को 6 भागों में बांटा गया है। इन भागों में अंकित चित्रों द्वारा इस रहस्यमयी किताब के बारे में कुछ हद तक जानकारी प्राप्त हुई है।

  • पहला भाग : 

     वायनिक मनुस्क्रिप्ट नामक इस किताब के पहले हिस्से में खगोल विज्ञान के बारे में बताया गया है। पहले भाग में सूर्यए चंद्रमा और तारों के चित्र देखने को मिलते हैं।

  • दूसरा भाग :

     दूसरा भाग जीव विज्ञान से संबंधित है। इस भाग में मानव अंगो के विभिन्न चित्र देखने को मिलते हैं।

  • तीसरा भाग :

     तीसरा भाग ब्रह्मांड विज्ञान से संबंधित है क्योंकि इस भाग में बहुत सारे गोल संरचनाएं दिखाई देती है।

  • चौथा भाग :  

      इस किताब का चौथा भाग पेड़ . पौधों से संबंधित है। इस भाग में कुछ ऐसे पौधों के भी चित्र दर्शाए गए हैं जो कि इस पृथ्वी पर मौजूद ही नहीं है।

  • पांचवा भाग :

      पांचवा हिस्सा जड़ी बूटियों एवं आयुर्वेद से संबंधित है जिसमें संभवतः विभिन्न औषधियों के बारे में बताया गया है।

  • छठवां भाग :

     वायनिक मनुस्क्रिप्ट नमक इस रहस्यमयी किताब का छठवां और आखिरी हिस्सा सबसे ज्यादा रहस्यमयी है क्योंकि इस हिस्से में कोई भी चित्र अंकित नहीं है और कुछ विशेष प्रकार की लिपि में कुछ लिखा गया है जिसे आज तक कोई भी समझ नहीं पाया। इसी कारण से इस भाग को समझ पाना बेहद मुश्किल है‌

     ऐसा प्रतीत होता है कि इस रहस्यमयी किताब की लिपि को समझ पाना लगभग मुश्किल ही है क्योंकि बहुत से लिपि विद्या जानने वाले इस किताब को समझने की कोशिश कर चुके हैं परंतु वे सभी असफल ही रहे हैं।

    संभवतः दोस्तों वायनिक मनुस्क्रिप्ट नामक इस रहस्यमयी किताब की लिपि अगर समझ आ गयी तो हमें प्राचीन इतिहास के बारे में एवं विभिन्न प्रकार की दुर्लभ जानकारी प्राप्त हो सकती है। परंतु दोस्तों क्या कभी हम इस रहस्यमयी किताब में लिखी हुई बातों को जान पाएंगे... 

    दोस्तों अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कीजिए और हमारे फेसबुक पेज को लाइक कीजिए ऐसे ही चटपटी रहस्यमयी मजेदार आर्टिकल्स के लिए...


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बुद्ध ग्रह को धरती से देखने का मौका...

11 नवंबर सन् 2019 दिन : सोमवार, दोस्तों इस तारीख को अपने कैलेंडर इत्यादि में चिन्हित कर लो यह समय आपके लिए बेहद ही खास हो सकता है। दोस्तों मै ऐसा इसलिए कह रहा क्योंकि खगोलशास्त्रियों एवं वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दिन सौरमंडल पर एक अनोखी और दुर्लभ घटना घटने वाली है। अगर आप इस दुर्लभ घटना को देखने से चूक गए तो अगली बार इस दुर्लभ घटना को देखने के लिए आपको 13 वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा अर्थात अगली बार यह दुर्लभ दृश्य सन् 2032 को देखने को मिलेगा। आइए दोस्तों जानते हैं इस दुर्लभ दृश्य के बारे में।


      11 नवंबर सन् 2019 दिन सोमवारए को सूर्यास्त के समय बुध ग्रह सूर्य के भीतर से गुजरने वाला है। बुध ग्रह को सूर्य से गुजरते हुए हम धरती से भी देख सकेंगे। परंतु दोस्तों बुध ग्रह को सूर्य से गुजरते हुए देखने के लिए हमें कुछ आवश्यक सावधानी बरतनी पड़ेगी क्योंकि बुध ग्रह बहुत छोटा होता है इसलिए उसे देखने के लिए टेलिस्कोप का उपयोग करना पड़ सकता है। यह घटना बहुत ही दुर्लभ होती है जिसे हम सूर्यास्त के समय धरती से देख सकेंगे।

      दोस्तों यह दुर्लभ घटना 100 सालों में सिर्फ 13 बार ही देखने को मिलता है। पिछली बार यह दृश्य 9 मई सन् 2016 को देखा गया थाए उससे पहले सन 2006 को यह घटना देखी गई थी। दोस्तों अगर आप इस बार इस दृश्य को देखने से चूक गये तो अगली बार ऐसा दृश्य देखने के लिए आपको 13 साल अर्थात् सन् 2032 तक इंतजार करना पड़ेगा।

      11 नवंबर सन् 2019 दिन सोमवार को बुध ग्रह का सूर्य से पारगमन होने वाली इस घटना के बारे में अपने दोस्तों एवं सगे संबंधियों को भी जरूर बताएं ताकि सभी लोग इस दुर्लभ घटना के बारे में जान सके और देख भी सके। इस आर्टिकल को अपने दोस्तों तक भी पहुंचाए ताकि सभी लोग इस दुर्लभ दृश्य के बारे में जान सकें और इस अनोखी दृश्य का आनंद उठा सकें।

    दोस्तों अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कीजिए और हमारे फेसबुक पेज को लाइक कीजिए ऐसे ही मजेदार और रहस्यमयी चटपटी आर्टिकल्स रोज पढ़ते रहने के लिए.... 


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