जमीन को हम कितनी गहराई तक खोद सकते है..?

    जैसा कि दोस्तों हम सभी जानते हैं यह पृथ्वी गोल है। इस हिसाब से एक प्रश्न यह उठता है कि अगर हम भारत के किसी एक भाग पर खुदाई करे तो क्या हम किसी दूसरे भू-भाग पर या देश अमेरिका तक पहुंच सकते हैं। जैसा कि हम जानते हैं भारत के ठीक पीछे अमेरिका आता है तो क्या हम भारत से सुरंग बनाकर अमेरिका जा सकते है क्या..? दोस्तों यह सवाल थोड़ा अजीब है परंतु इस सवाल में दम तो है, तो आइये अब जानते है की जमीन को हम कितनी गहराई तक खोद सकते है..?



      बचपन में हमने पढ़ा था कि यह धरती अलग-अलग परतों से बनी हुई है परंतु हैरान कर देने वाली बात यह है कि वैज्ञानिक भी आज तक यह पता नहीं लगा पाए कि आखिर इन परतों के नीचे क्या है? वैज्ञानिकों का सिर्फ अनुमान है कि इन परतों के नीचे खनिज या कुछ ऐसी जरूरी पदार्थ हो सकते हैं जो कि किमती और हमारे लिए उपयोगी है। परंतु यह सिर्फ एक अनुमान है सच क्या है यह किसी को नहीं पता। धरती के अंदर तक जाने के लिए विभिन्न देशों ने बहुत प्रयास किए परंतु हर बार असफलता ही हाथ लगी। दोस्तों आज हम आपको बताएंगे एक ऐसी जगह के बारे में जो कि मनुष्यो द्वारा धरती पर खोदी गई सबसे अधिक गहरी जगह है। इस जगह की गहराई में छुपी है अनेकों रहस्य जो कि आपको निश्चित ही सोचने पर मजबूर कर देंगे।

     सोवियत यूनियन ने रूस में एक खुदाई की जो कि धरती की सबसे गहरी जगह है जिसमे 167 क़ुतुब मीनार समा जाये अब आपको आश्वर्य यह होगा की फिर कितनी होगी इस जगह की गहराई ? तो अब हम आपको बता दे की वो जगह की गहराई 12 किलोमीटर है। 12 किलोमीटर गहरी इस जगह का नाम "कोला सुपरडीप होल" रखा गया है। यह कोला सुपरडीप होल समुद्र की सबसे अधिकतम गहराई से भी ज्यादा गहरा है। 12 किलोमीटर इस गड्ढे में अनेकों रहस्य छुपे हुए हैं जिसमें से कुछ  रहस्यों के बारे में बताया गया है। आइए जानते हैं कुछ विशेष और महत्वपूर्ण रहस्यों के बारे में।

      12 किलोमीटर गहरे इस गड्ढे को जब 7 किलोमीटर तक खोदा गया था तब वैज्ञानिकों को इस जगह पर पाए जाने वाले पत्थरों में जल मिला था। वैज्ञानिकों ने बताया यह जल वहां पर मौजूद ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के कारण मिला है।

      इस गड्ढे की सबसे बड़ी खोज यह थी कि इसमें वैज्ञानिकों को सूक्ष्मजीव भी मिले। इतने गहरे गड्ढे में वो भी इतने अधिक तापमान होने पर भी वहां किसी ने भी जीवन की कल्पना नहीं की थी क्योंकि धरती के अंदर गहराई में जाने पर तापमान लगातार बढ़ता रहता है। खोजकर्ताओं का मानना था कि यह सिर्फ एक ही प्रकार के सूक्ष्म जीव होंगे परंतु बाद की खोजो से पता चला कि एक नहीं बल्कि बहुत प्रकार के सुक्ष्मजीव वहां मौजूद थे जो कि बहुत ज्यादा पुराने पत्थरों में पाए गए थे। धरती के अंदर के ये पत्थर 2 बिलियन वर्ष पुराने हैं और आज भी उसी स्थिति में मौजूद है। खोजकर्ताओं को इस गड्ढे के नीचे हिलियम, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे बहुत सारे गैस भी मिले।

     सन् 1994 में कोला सुपरडीप होल को बंद कर दिया गया। खोजकर्ताओं का कहना था कि इस गड्ढे के सबसे अंतिम छोर में तापमान 180 डिग्री सेल्सियस था और इतने अधिक तापमान में कार्य जारी रखना संभव नहीं था। जैसा कि हम सभी जानते हैं 100 डिग्री सेल्सियस में पानी उबलने लगता है परंतु वहां तो तापमान 180 डिग्री सेल्सियस था इस कारण इस गड्ढे की खुदाई कार्य को बंद करना पड़ा। ऐसा खोजकर्ताओं ने बयान जारी किया था।

     इसके अलावा कुछ लोगों का यह भी मानना था कि उस गड्ढे से इंसानों के चीखने की आवाज आ रही थी इस कारण खोजकर्ता डर गए थे कि कहीं वह नरक तक खुदाई ना कर दे। कुछ खोजो में यह भी दावा किया गया था कि यह चीखे आत्माओं की है जो कि नरक में निवास करती है इस कारण इस गड्ढे को नरक का कुआं भी कहा जाता था। संभवतः यह बात महज़ एक झूठ हो सकती है क्योंकि ऐसा सिर्फ लोगों का अनुमान था। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कुछ रहस्यमयी कारणों की वजह से इस गड्ढे को बंद कर दिया गया।

     इस कोला सुपरडीप होल को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है ताकि भविष्य में अगर कोई भी इस प्रोजेक्ट को पुनः चालू करवाना चाहे तो भी ना करा सके। दोस्तों अगर यह आर्टिकल आपको पसंद आया है तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कीजिए और हमारे फेसबुक पेज को लाइक कीजिए ऐसे ही रहस्यमयी और मजेदार आर्टिकल्स के लिए........
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