दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा नहीं, ये है...


हम सब यही मानते हैं कि अफ्रीका महाद्वीप का सहारा रेगिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान है। परंतु दोस्तों अंटार्कटिक दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान है जो कि चारों ओर से पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ बर्फ से ढका हुआ है। इस जगह को दुनिया का आखिरी कोना भी कहा जाता है। इस जगह पर  बहुत कम बारिश होती है इस वजह से इसे ठंडा रेगिस्तान भी कहा जाता है। हाल ही में इस महाद्वीप के बारे में कुछ अजीबो-गरीब रहस्यो के बारे में पता चला है जिसके बारे में हम आपको आगे बताएंगे।


     अंटार्कटिका में बहुत ज्यादा ठंड होने के कारण कोई भी इंसान यहां स्थायी रूप से नहीं रह सकता। हालांकि यहां पर कुछ देशों के रिसर्च स्टेशन है जहां लोग खोज के लिए आते जाते रहते हैं। पृथ्वी का सबसे शुष्क स्थान भी इसी अंटार्कटिका महाद्वीप में स्थित है जिसे ड्राइ वैली के नाम से जाना जाता है। अंटार्कटिका में सन् 1962 से एक  न्यूक्लियर पावर स्टेशन भी है। अंटार्कटिका में एक फायर स्टेशन भी है, आपको बता दें कि अंटार्कटिका में आग लगने का कोई सवाल ही नहीं उठता। अंटार्कटिका का 99% हिस्सा बर्फ से ढका हुआ है।

     कहा जाता है कि करीब 53 लाख साल पहले अंटार्कटिका बहुत गर्म स्थान हुआ करता था और इसके किनारों पर खजूर का पेड़ आसानी से देखा जा सकता था। उस समय तापमान लगभग 20°C से ज्यादा ही होता था। सन् 1820 में अंटार्कटिका को सबसे पहली बार देखा गया। अंटार्कटिका पर कोई भी अपना अधिकार नहीं जमा सकता। सन् 1959 में 12 देशों ने एक संधि के तहत इस जगह को शांतिपूर्ण अनुसंधान कार्य के लिए चुना।

     पूरी धरती में मौजूद पानी का लगभग 70% हिस्सा अंटार्कटिका में ही पाया जाता है। अंटार्कटिका महाद्वीप के नीचे लगभग 300 से भी ज्यादा ठंडे पानी की झीले पायी जाती है। अंटार्कटिका में एक सक्रिय ज्वालामुखी भी है। धरती का अब तक का सबसे न्यूनतम तापमान -88.3 सेल्सियस इसी जगह पर मापा गया है। यहां पर 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी तेज हवाएं चलती है जो कि बर्फ की एक बड़ी एवं मोटी हिस्से को भी उड़ा ले जाती है।

अंटार्कटिका का सबसे बड़ा रहस्य :-
            अंटार्कटिका के लिविंगस्टन नामक द्वीप में सन् 1918 में रिसर्चर्स को एक महिला की खोपड़ी और पैर की एक हड्डी मिली जो कि 175 साल पुरानी थी। रिसर्च में यह बताया गया कि यह खोपड़ी और हड्डी किसी 21 वर्षीय चीली महिला की है जिसकी मृत्यु सन् 1819 से 1825 के बीच में हुई थी। कहा जाता है कि अंटार्कटिका में पाया गया यह अब तक का सबसे पुराना इंसानी अवशेष है। सबसे बड़ा रहस्य यह है कि जिस जगह पर इस महिला का अवशेष पाया गया है उस जगह से चीली करीब 1000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है। अब सवाल यह बनता है कि आखिर वह महिला उस जगह पर कैसे पहुंची जबकि उस समय वहां पर नाव एवं डोंगियो के सहारे भी जाना असंभव था, यह आज तक रहस्य ही बना हुआ है।

     अंटार्कटिका के बर्फ के 3.5 किलोमीटर नीचे झील भी मौजूद है। अंटार्कटिका के बर्फ के 1 किलोमीटर नीचे वैज्ञानिकों को सूक्ष्मजीव भी मिले हैं। इन सुक्ष्मजीवो में कुछ विशेष प्रकार के पारिस्थितिक तंत्र भी मिले हैं जो धरती पर अन्य जगहों में नहीं पाए जाते हैं। अजीब बात यह है कि इन जीवो को न तो सूर्य प्रकाश मिल रही है और ना ही ताजी हवा मिलती है फिर भी ये सुक्ष्मजीव लंबे समय से जीवित रह रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इन सूक्ष्मजीवो का विकास मीथेन एवं अमोनिया की वजह से हो रहा है।

    अंटार्कटिका में इंसानों का रहना लगभग असंभव था ऐसी विषम परिस्थिति वाली अंटार्कटिका में भी क्रूर तानाशाह शासक हिटलर का नाजी बेस मौजूद है। द्वितीय विश्वयुद्ध के शुरुआती समय में हिटलर ने कुछ गुप्त मिशन के तहत सैनिकों को रवाना कर दिया। हालांकि यह गुप्त मिशन कुछ महीनों तक ही चला और 5 फरवरी सन् 1939 को नाजी सेना अंटार्कटिका से वापस आ गयी।

     अंटार्कटिका में कुछ ऐसी बर्फ सीड्स की खोज की गई है जिनसे जब हवा टकराती है तो किसी महिला के रोने की आवाज सुनाई देती है। हालांकि इस आवाज को हम मनुष्य सुन या महसूस नहीं कर सकते परंतु कुछ विशेष मशीनों की मदद से इस आवाज को आसानी से सुना जा सकता है।
      
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