• जानिये फांसी देने के पूर्व कैदी के कान में जल्लाद क्या कहता है... ईनाम...

    नमस्कार दोस्तो आज हम आपको ले जायेंगे एक ऐसे रहस्य की ओर जिसको आप भी जानना चाहेंगे, दोंस्तो अक्सर आपने फिल्मो मे देखा होगा या कहीं से सुना होगा की किसी अपराधी को फंासी पर चढाने के पूर्व जल्लाद कैदी के कानो मे कुछ कहता है। तो दोस्तो आज हम आपको इस रहस्य से वाकिफ कराना चाहेंगे । नको ईनाम भी दिया जाता है।

  • माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स

    दोस्तो आज हम बात करेंगे माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स के बारे में। दोस्तो माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स लडकियाॅ थी।

  • जानिए दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान कौन था...

    नमस्कार दोस्तो, हर कोई जानना चाहता है की दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान तो आइये आज हम जानते है हमारे अस्तित्व के बारे मे, आइये जानते है हमारे इतिहास को । इसके अलावा आज हम आपको बतायेंगे उस महिला के बारे मे जिसने दुनिया पर पहली बार बच्चा पैदा किया।

जानिए विश्व के सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय के बारे में...

इंग्लैंड में स्थित कैंब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय हमेशा से ही विश्वप्रसिद्ध रहा है। देश-विदेश से अनेकों लोग वहां अध्ययन करने की लालसा रखते हैं लेकिन कुछ लोगों का ही यह सपना पूरा हो पाता है। दोस्तों आज हम बात करेंगे विश्व की सबसे प्राचीन प्रथम विश्वविद्यालय के बारे में।

    विश्व का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला है जो कि भारत में ईसा के 700 साल पहले गंधार राज्य के तक्षशिला में स्थापित किया गया था। वर्तमान में यह स्थान भारत विभाजन के कारण पाकिस्तान के रावलपिंडी जिले में है। वर्तमान में यह विश्वविद्यालय खंडहर बन चुका है। आइए दोस्तों जानते हैं भारत की इस प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला के बारे में विस्तार से कुछ मजेदार जानकारी।

    तक्षशिला विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए एक परीक्षा पास करनी होती थी। यह परीक्षा बहुत ही कठिन होता था बहुत कम विद्यार्थी ही इस परीक्षा में सफल हो पाते थे। प्राचीन भारत में तक्षशिला में 60 से भी ज्यादा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई होती थी जिनमें से कुछ पाठ्यक्रम निम्नानुसार है -

  • वेद
  • आयुर्वेद
  • संगीत
  • नृत्य 
  • राजनीति 
  • दर्शन 
  • सर्जरी 
  • गणित 
  • विज्ञान 
  • युद्ध कला 
  • तीरंदाजी कला 
  • खगोल 
  • अर्थशास्त्र 
  • चिकित्सा 
  • व्याकरण 
  • शस्त्र संचालन 
  • मनोविज्ञान 
  • कृषि 
  • योग विज्ञान
आदि.......
   
       तक्षशिला में देश विदेशों से आए 10,000 से भी अधिक विद्यार्थियों ने अध्ययन किया। 500 ईसा पूर्व जब दुनिया में चिकित्सा शास्त्र की परंपरा भी नहीं थी तब तक्षशिला आयुर्वेद विज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र था। अनेक असाध्य रोगों का इलाज यहां आसानी से एवं जड़ी-बूटियों की सहायता से किया जाता था।

    आचार्य चाणक्य जिसको विष्णुगुप्त और कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन संस्कृत भाषाविद् और व्याकरणविद् पणिनीः एवं चरक संहिता के रचयिता चरक तथा इसके अलावा और भी बहुत सारे विद्वान तक्षशिला विश्वविद्यालय के ही विद्यार्थी थे।

   चाणक्य तक्षशिला विश्वविद्यालय के स्नातक और अध्यापक थे। चाणक्य के शिष्यों में से चंद्रगुप्त मौर्य सर्वाधिक प्रसिद्ध हुआ। चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु के साथ मिलकर मौर्य साम्राज्य की स्थापना किया।
   
‌‌   सातवीं सदी ईसा पूर्व से पांचवी सदी तक तक्षशिला विश्वविद्यालय बहुत अच्छी तरह से चल रहा था लेकिन छठवीं सदी के शुरुआत तक विदेशी हमलावरों ने इस प्राचीन विश्वविद्यालय को पूरी तरह से नष्ट कर दिया।
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एक ऐसी रहस्यमयी गुफा, जो पिछले 55 सालों से पहले हमसे छिपी हुई थी...

दोस्तों रोमानिया की साउदर्न ईस्ट पर एक ऐसी रहस्यमयी गुफा है जो पिछले 55 सालों से पहले हमसे छिपी हुई थी। यह जगह जितनी रहस्यमयी है उतनी खतरनाक भी है। दोस्तों हम बात कर रहे हैं रोमानिया की मोविल केव (Movile cave) के बारे में जो कि अन्य गुफाओं की तुलना में बहुत ही ज्यादा अद्भुत और रहस्यमयी है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।

    पावर प्लांट के कुछ वर्कर्स इस जगह पर कुछ टेस्ट कर रहे थे तभी अनजाने में एक रास्ता खुल गया जिसके अंदर का वातावरण बाहरी दुनिया से बिल्कुल ही अलग और रहस्यमयी था। इस महीन दरवाजे और कुछ गुफाओं के समूह को पार करने पर एक ऐसी जगह मिली जहां पर एक झील है जो की पूरी तरह से सल्फ्यूरिक एसिड से भरी हुई है एवं यहां सड़े हुए कीड़े मकोड़ों की अजीब सी बदबू भी आती है। इस जगह का वातावरण बहुत ही ज्यादा जहरीली है जिसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा बहुत अधिक है और हमारे वातावरण में पाए जाने वाले कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में इस जगह पर 100 गुना ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड मौजूद है।

    किसी ने भी इस जगह पर जीवन की कल्पना नहीं की थी परंतु यहां पर 33 प्रकार के कीड़े-मकोड़े की प्रजाति पाई गई जो कि सिर्फ इसी जगह पर पाई जाती है। यह 33 प्रकार के कीड़े-मकोड़े पूरी पृथ्वी को छोड़कर सिर्फ इसी जगह पर पाई जाती हैं। यह कीड़े मकोड़े ऐसी जहरीली वातावरण में जीवित रहने के लिए अपने आप को अनुकूलित कर चुके हैं इस कारण से यह जीव सिर्फ इसी जगह पर पाए जाते हैं। दोस्तों जैसा कि हमें पता है कि जीवन के लिए सूर्य प्रकाश जरूरी है हैरान कर देने वाली बात यह है कि यहां पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंच पाता फिर भी यह कीड़े मकोड़े जहां पर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
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जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर की कुछ गुप्त और खतरनाक हथियार...

जर्मनी के तानाशाह और "नाजी पार्टी" के नेता एडोल्फ हिटलर के बारे में तो आपने सुना ही होगा। 1 सितंबर सन् 1939 को हिटलर ने पोलैंड पर हमला कर दिया। चूंकि फ्रांस और ब्रिटेन ने पोलैंड को सुरक्षा देने का वादा किया था इस वजह से फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और इस तरह से द्वितीय विश्व युद्ध का आरंभ हुआ। चूंकि यह युद्ध हिटलर द्वारा पोलैंड पर हमला करने से प्रारंभ हुआ इस कारण हिटलर को ही द्वितीय विश्व युद्ध का सर्वाधिक जिम्मेदार माना जाता है। जैसा कि दोस्तों आपने सुना होगा हिटलर की सेना बहुत शक्तिशाली थी और उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बहुत ही घातक हथियारों का उपयोग किया। इन खतरनाक हथियारों ने मानव जाति का भरपूर विनाश किया। परंतु दोस्तों हिटलर के पास कुछ ऐसे हथियार भी थे जो कि बेहद खतरनाक से भी अधिक खतरनाक थे। उनमें से कुछ हथियार तो पूरी तरह से बनकर तैयार भी नहीं हुए थे। अगर वे हथियार तैयार हो जाते तो शायद ऐसा संभव था कि द्वितीय विश्वयुद्ध का परिणाम हमें कुछ और ही देखने को मिलता। आइए दोस्तों जानते हैं हिटलर के कुछ खतरनाक और गुप्त हथियारों के बारे में।

1. STG 44 :- यह दुनिया की सबसे पहली असाॅर्ट रायफल थी। इस हथियार को इतना ज्यादा पसंद किया गया कि इसकी नकल करके ही AK-47 और M16 जैसी बहुत सारी बंदूके बनाई गई जो आज भी पूरी दुनिया में सबसे मशहूर और अच्छी बंदूके है। इस बंदूक की एक और विशेषता यह थी कि इस पर जरूरत पड़ने पर एक मुड़ी हुई नली (बैरल) भी लगाई जा सकती थी। यह बैरल 4 तरह की होती थी जो 30 डिग्री, 45 डिग्री, 60 डिग्री और 90 डिग्री तक मुड़ी हुई होती थी। इन बैरल की वजह से सैनिक छिपकर  भी वार कर सकते थे। इस बंदूक का उपयोग विश्वयुद्ध के अंतिम कुछ महीनों में ही किया गया।

2. The Sun Gun :-  हिटलर के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी योजना बनाई थी कि वह पृथ्वी के ऊपर 1.5 किमी डायामीटर का एक आईना भेजेंगे जो सूर्य की किरणों को परावर्तित कर उसे एक निर्धारित जगह पर फोकस (केंद्रित) करके उसे जला सके। यह योजना इतनी खतरनाक थी कि इससे दुश्मनों के किसी भी शहर को जलाया जा सकता था एवं समुद्र के किसी भाग को उबाला जा सकता था। हालांकि इस योजना को सफल बनाने में हिटलर के नाजी वैज्ञानिक असमर्थ रही।

3. Schwerer Gustav :-  1350 टन वजनी यह तोप मनव इतिहास में उपयोग में लाया गया सबसे बड़ा हथियार था। इस तोप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए रेल ट्रैक का इस्तेमाल करना पड़ता था। यह तोप 7 टन वजनी गोला दाग सकता था जो कि 25 मील की दूरी तक हमला करने की क्षमता रखता था।

4. The V3 Super Gun :- लंदन शहर को खात्मा करने के लिए हिटलर ने इस बंदूक का निर्माण करवाया था। यह बंदूक प्रति घंटे 300 राउंड फायर कर सकती थी। इस गन की मारक क्षमता भी बहुत ज्यादा अच्छी थी। इतिहासकारों के अनुसार यह हथियार हिटलर की सेना का सबसे शक्तिशाली हथियार था। जब इस हथियार को लंदन की तरफ ले जाया जा रहा था तभी अंग्रेजों की सेना ने रास्ते में ही आक्रमण कर दिया और इस हथियार को नष्ट कर दिया।

5. Sonic Canon :- नाजी वैज्ञानिक 1940 के दशक में सोनिक कैनन जैसे खतरनाक हथियार को बनाने में लगे थे। इस हथियार मे मीथेन और ऑक्सीजन की अभिक्रिया से निकलने वाली धमाके की आवाज को बड़ी-बड़ी यंत्रों द्वारा इंफ्रासाऊंड में परिवर्तित कर दुश्मन की तरफ छोड़ा जाता था। इस हथियार की तेज धमाके की आवाज इतनी खतरनाक थी कि अगर 50 मीटर दूर खड़े किसी व्यक्ति पर यह ध्वनि छोड़ दी जाए तो महज 30 मिनट मे ही उस व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो सकती थी।

6. X-Ray Gun :- नाजी जर्मनी वैज्ञानिक X-Ray गन बनाने की ओर अग्रसर थी। जर्मनी के वैज्ञानिक रेडियोएक्टिव लेजर राइफल बनाने के बहुत करीब पहुंच चुके थे जिसे बाकी देश बनाने में असफल रहे थे। यह रेडियोएक्टिव लेजर राइफल बिना किसी धमाके की आवाज के दुश्मनों को मार गिराने की क्षमता रखता था।

     तो दोस्तों यह थी जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर की कुछ गुप्त और खतरनाक हथियार । इनमें कुछ ऐसे हथियार भी शामिल है जिनका निर्माण समय पर नहीं हो पाया था अगर इन हथियारों का निर्माण समय पर हो जाता तो शायद ऐसा संभव था कि विश्वयुद्ध का परिणाम हमें कुछ और ही देखने को मिलता। दोस्तों अगर यह आर्टिकल पसंद आया है तो अपने दोस्तों के साथ भी शेयर कीजिए और हमारे फेसबुक पेज को लाइक कीजिए ऐसे ही चटपटी, मजेदार और रहस्यमयी आर्टिकल्स के लिए.........

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