• जानिये फांसी देने के पूर्व कैदी के कान में जल्लाद क्या कहता है... ईनाम...

    नमस्कार दोस्तो आज हम आपको ले जायेंगे एक ऐसे रहस्य की ओर जिसको आप भी जानना चाहेंगे, दोंस्तो अक्सर आपने फिल्मो मे देखा होगा या कहीं से सुना होगा की किसी अपराधी को फंासी पर चढाने के पूर्व जल्लाद कैदी के कानो मे कुछ कहता है। तो दोस्तो आज हम आपको इस रहस्य से वाकिफ कराना चाहेंगे । नको ईनाम भी दिया जाता है।

  • माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स

    दोस्तो आज हम बात करेंगे माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स के बारे में। दोस्तो माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली ट्विन्स लडकियाॅ थी।

  • जानिए दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान कौन था...

    नमस्कार दोस्तो, हर कोई जानना चाहता है की दुनिया में जन्म लेने वाला पहेला इंसान तो आइये आज हम जानते है हमारे अस्तित्व के बारे मे, आइये जानते है हमारे इतिहास को । इसके अलावा आज हम आपको बतायेंगे उस महिला के बारे मे जिसने दुनिया पर पहली बार बच्चा पैदा किया।

₹ 1.47 लाख करोड़ की फ़ैल सिटी। भारत का पहला प्राइवेट सिटी कैसे और क्यों फ़ैल हो गया...?

हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) के चेयरमैन अजीत गुलाबचंद ने एचसीसी कंपनी के साथ महाराष्ट्र के सहयाद्री पर्वत के बीच में एक ड्रीम प्रोजेक्ट लवासा सिटी बनाने का निर्णय किया। इस ड्रीम प्रोजेक्ट लवासा सिटी में 5 सबटाउन्स बनाने की प्लानिंग थी जिनमें से प्रत्येक टाउन की एक अपनी ही विशेषता थी। लवासा सिटी में बहुत सारे सुंदर घर एवं पर्यटन के लिए आकर्षण का केंद्र बनाने की प्लानिंग थी। लवासा प्रोजेक्ट 25000 एकड़ के क्षेत्रफल में बनाया जा रहा था। उस समय लवासा प्रोजेक्ट पूरे भारत में सूर्खियों पर था, यह उस समय की सबसे बड़ी प्रोजेक्ट थी। बहुत सारे लोगों ने इस प्रोजेक्ट में अपने पैसे इन्वेस्ट किए थे। लवासा सिटी प्रोजेक्ट 2 लाख लोगों के हिसाब से प्लान किया गया था लेकिन आज की तारीख में यहां पर 20 हजार लोग भी नहीं रहते। इस सिटी को बनाने के लिए अरबों रुपए लगाए गए थे। लेकिन आखिर ऐसा क्या हुआ कि इतने बड़े प्रोजेक्ट जो कि 2 लाख लोगों के लिए बनाए गए थे वहां आज 20 हजार लोग भी नहीं है.....? आखिर क्या वजह थी जिसके कारण यह प्रोजेक्ट अभी तक सफल नहीं हो पाया.....? आइए जानते हैं ड्रीम प्रोजेक्ट लवासा सिटी के बारे में।

   साल 2008-9 तक लवासा सिटी की कुछ शहर बनकर तैयार भी हो गए थे लेकिन 2010 में लवासा सिटी प्रोजेक्ट पर काले बादल मंडराने शुरू हो गए मतलब इस प्रोजेक्ट पर आगे कार्य करना मुश्किल होता गया। दरअसल बात ऐसी है कि इस तरह के प्रोजेक्ट पर कार्य करने के लिए बहुत सारे नियमों का पालन करना होता है एवं बहुत सारी अनुमति भी लेनी पड़ती है। लवासा सिटी के लिए राज्य शासन से तो अनुमति ली गई थी लेकिन केंद्रीय शासन से इसकी अनुमति नहीं ली गई थी। लोगों की बहुत सारी शिकायतें आने के पश्चात आखिरकार पर्यावरण मंत्रालय ने लवासा सिटी प्रोजेक्ट को नोटिस भेजा जिससे इस प्रोजेक्ट कार्य को स्थगित करना पड़ा। लवासा सिटी प्रोजेक्ट एवं महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि लवासा सिटी समुद्र सतह से 100 मीटर की ऊंचाई से कम है इसलिए इस प्रोजेक्ट को हिल डेवलपमेंट के नियम के अंतर्गत नहीं रखा जा सकता इसलिए केंद्र शासन की अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है। लेकिन केंद्रीय शासन के अनुसार लवासा सिटी प्रोजेक्ट समुद्र सतह से 100 मीटर अधिक है एवं इसके लिए केंद्र शासन की अनुमति लेना भी अनिवार्य है। उस दौरान पर्यावरण मंत्रालय का यह भी नियम था कि यदि कोई भी प्रोजेक्ट 50 करोड़ से अधिक की कीमत का होता है तो उस समय अनुमति लेना अनिवार्य था लेकिन लवासा सिटी प्रोजेक्ट में ऐसा नहीं किया गया था।

    इसके अलावा और भी कुछ नियम है जिसका उल्लंघन लवासा सिटी में किया जा रहा था जैसे हिल डेवलपमेंट अथॉरिटी के अनुसार किसी भी हिल स्टेशन क्षेत्र में 3 मंजिल से ज्यादा की बिल्डिंग नहीं बनानी चाहिए लेकिन लवासा सिटी में कुछ 6 मंजिल की बिल्डिंग भी बनाई गई थी। इस तरह से इस प्रोजेक्ट की मुश्किलें और भी बढ़ती गई।

   ड्रीम प्रोजेक्ट लवासा सिटी जो कि हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) के अंडर प्रोजेक्ट थी इस समय यह भी कर्ज में डूबी हुई थी इस वजह से एचसीसी भी इस प्रोजेक्ट को वापस से संभाल नहीं पाई और इस प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। वर्तमान में लवासा सिटी प्रोजेक्ट एक पर्यटन बिंदु बना हुआ है जहां आसपास एवं मुंबई, पुणे सिटी के लोग पिकनिक के लिए एवं फोटोशूट आदि कार्यो के लिए आते जाते रहते हैं।

    वर्तमान में लवासा सिटी में विजिट करने के लिए आपको ₹500 का एंट्री पास देना होता है। यह पैसे इसलिए लिए जाते हैं ताकि लवासा में कुछ सबसिटीस बची हुई है उसका संरक्षण एवं रखरखाव अच्छे से किया जा सके।

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पद्मनाभ मंदिर के खजाने के खास रहस्य...

भारत में केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभ स्वामी का मंदिर अपने अनोखे रहस्य के कारण हमेशा से विश्व प्रसिद्ध रहा है। इस मंदिर के तहखाने में 6 रहस्यमयी दरवाजे है जिनमें से 5 दरवाजों को अभी तक खोला जा चुका है परंतु छठवें दरवाजे को अभी तक नहीं खोला गया है। ऐसा कहा जाता है कि अगर इस छठे दरवाजे को जबरदस्ती खोला गया तो यह दुनिया तबाह हो सकती है एवं यह भी कहा जाता है कि इस छठवें दरवाजे के अंदर पाताल लोक जाने का रास्ता है। ऐसी और भी बहुत सारी मान्यताएं इस दरवाजे को लेकर प्रचलित है। इस छठवें दरवाजे को खोलने के लिए न तो कोई ताला लगा हुआ है ना ही कुंडी और ना ही किसी प्रकार का कोई मेकैनिज्म है जिससे कि इस दरवाजे को खोला जा सके। यह दरवाजा पूरी तरह से बंद है और कहा जाता है कि इस दरवाजे को सिर्फ मंत्र उच्चारण द्वारा ही खोला जा सकता है। आइए दोस्तों जानते हैं इस मंदिर और इसके रहस्य के बारे में विस्तार से।

   केरल राज्य के तिरुअनंतपुरम में स्थित पद्मनाभस्वामी का यह मंदिर भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजित है। त्रावणकोर के राजाओं ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। राजा मार्तंड वर्मा ने इस मंदिर का निर्माण कराया था।

  आजादी के पूर्व त्रावणकोर के राजाओं ने यहां 1947 तक राज किया। आजादी के बाद इस जगह को भारत में विलय कर दिया गया इसके बाद भी सरकार ने पद्मनाभस्वामी मंदिर को अपने कब्जे में नहीं लिया और इस मंदिर को त्रावणकोर के शाही परिवार को ही सौंप दिया। तब से इस मंदिर का संचालन शाही परिवार के अधीनस्थ एक प्राइवेट ट्रस्ट कर रहा है।

   रहस्य :- 

          इस मंदिर के तहखाने में 6 रहस्यमयी दरवाजे हैं। सन् 1908 में पहली बार इन दरवाजों को खोलने का प्रयास किया गया परंतु जैसे ही पहला दरवाजा खोलने की कोशिश की गई वहां लोगों के सामने कोबरा सांपों का एक झुंड आ गया और दरवाजा खोला नहीं जा सका। सन 1931 में पुनः इस दरवाजे को खोलने का प्रयास किया गया तब उस समय यह दरवाजा खुल गया और दरवाजे के उस पार जो था उसे देखकर सबके होश उड़ गए। दरवाजे के उस पार करोड़ों के मूल्य की बेशकीमती खजाने थे। लोगों ने कहा यह खजाना दिव्य है इसे इंसानों को नहीं छूना चाहिए और फिर पहले दरवाजे को वापस से बंद कर दिया गया और बाकी के दरवाजे को भी नहीं खोला गया। बाकी के दरवाजों को क्यों नहीं खोला गया यह किसी को नहीं पता।

    सन् 2011 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के रहस्यमयी दरवाजों को खोलने का आदेश दिया गया। एक के बाद एक मंदिर के तहखाने के 5 रहस्यमयी दरवाजों को खोला गया और दरवाजे के उस पार बेशकीमती सोने-चांदी मिलते गए। पांचों रहस्यमयी दरवाजे के अंदर से मिले खजाने की कुल कीमत लगभग-लगभग 22 सौ करोड़ डॉलर आंकी गई थी। इन खजानों में पुराने सोने के सिक्के, ऐतिहासिक स्वर्ण मूर्तियां, मुकुट आदि पाए गए थे।

    पांच दरवाजों को खोलने के बाद अब बारी थी छठे दरवाजे की। दोस्तों छठवां रहस्यमयी दरवाजा बहुत ही रोचक और अद्भुत है इसके बारे में हम आपको अगले आर्टिकल में विस्तार से जानकारी देंगे।


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